रई पुल के नीचे यक्षवती नदी में डाला गया कचरा। संवाद
पिथौरागढ़। सालों से यक्षवती नदी को पुनर्जीवित कर इसे निर्मल बनाने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं लेकिन खुद सिस्टम इन अभियानों को पलीता लगा रहा है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि नदी से ऊपर बने सार्वजनिक शौचालय की गंदगी नदी में ही प्रवाहित हो रही है।
संवाद न्यूज एजेंसी ने यक्षवती नदी को निर्मल और स्वच्छ बनाने के दावों की हकीकत जानने के लिए पड़ताल की। इसमें नदी को निर्मल बनाने के दावे करने वाले जिम्मेदारों की बड़ी लापरवाही सामने आई। रई पुल में नगर निगम ने सार्वजनिक शौचालय बनाया है इसकी गंदगी सीधे नदी में प्रवाहित हो रही है। वहीं पुल के दोनों तरफ कचरा फेंका गया है जिस पर किसी की नजर नहीं पड़ रही है।
नमामि गंगे सहित कई अभियान चलाकर नदियों को निर्मल बनाने के दावे हो रहे हैं। नदियों में गंदे नाले छोड़ने वालों पर कार्रवाई की बात भी हो रही है। इन सब के बीच यक्षवती के ऊपर सार्वजनिक शौचालय बनाना और इसकी गंदगी इसमें प्रवाहित करना इन सभी दावों और बातों की हकीकत बयां कर रहा है।
आधे किलोमीटर में मैली हो जाती है यक्षवती
असुरचुला की तलहटी यक्षवती नदी का उद्गम है। यहां से बहने वाली नदी आरटीओ कार्यालय को जोड़ने वाली सड़क पर बने पुल से नीचे तक स्वच्छ नजर आती है। इससे आगे आधा किलोमीटर का सफर तय करते ही नदी मैली हो गई है। नदी का पानी काला नजर आ रहा है। इसका प्रमुख कारण सफाई न होना, कचरा और सीवर डालना है।