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सोई सरकार, मरा विपक्ष, जनता बेहाल, भगवान भरोसे पिथौरागढ़ के अस्पताल

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देवलथल में लोगों ने स्वास्थ्य मंत्री का पुतला फूंका। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। सीमांत जिले के संसाधन विहीन अस्पताल डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार की सुस्ती के चलते शासन-प्रशासन भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। जनता का हितैषी होने का दंभ भरने वाले सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष के जनप्रतिनिधि क्षेत्र की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मौन है। ऐसे हालात में स्थानीय लोग भगवान भरोसे जीने को मजबूर हैं।
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पिथौरागढ़ जिला महिला अस्पताल में प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं के मौत के मामले बढ़ते जा रहे हैं। पिछले चार वर्षों में 15 से अधिक महिलाओं की मौत हो गई है। बीते ढाई माह में प्रसव के बाद चार महिलाओं की जान चली गई है। वहीं समय से अल्ट्रासाउंड नहीं होने से 297 शिशुओं ने गर्भ में ही दम तोड़ दिया।
वर्ष 2016 में 125 नवजातों की मौत हुई। 2017 में 67, वर्ष 2018 में 75, 2019 में 20 और 2020 में अब तक चार से अधिक मासूमों की गर्भ में ही जान चली गई है। इतनी मौतों के बाद भी शासन-प्रशासन व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर कोई प्रयास नहीं कर रहा है।
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पिथौरागढ़ के अस्पतालों में डॉक्टरों के 70 फीसदी से अधिक पद रिक्त हैं। पिथौरागढ़ जिला अस्पताल में पिछले चार वर्षों में उपचार के दौरान 881 लोगों की मौत हो गई है। साथ ही 6905 से ज्यादा लोग रेफर हो चुके हैं। विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि रिक्त पदों को भरने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार कुंभकर्णी नींद में सो रहा है। विपक्ष जन मुद्दों को नहीं उठा रहा है। जिसका खामियाजा सीमांत के गरीब लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
महिला अस्पताल खून की जांच की सुविधा नहीं
पिथौरागढ़। जिले के सबसे बड़े महिला अस्पताल में खून की जांच की सुविधा नहीं है। अस्पताल में उपचार को आए लोग निजी लैबों में खून की जांच कराने को मजबूर हैं। निजी लैब भी लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे मनमाने दाम वसूल रहे हैं।
नियमित रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से गर्भवती महिलाएं हैं परेशान
पिथौरागढ़। जिले के सबसे बड़े महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत नहीं है। यहां पर सप्ताह में एक दिन लोहाघाट से रेडियोलॉजिस्ट आकर महिलाओं के अल्ट्रासाउंड कर रहे हैं। लंबे समय से लोग नियमित रेडियोलॉजिस्ट को तैनात करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी सरकार को सीमांत के लोगों का दर्द नहीं दिख रहा है।
पिथौरागढ़ के अस्पतालों में पिछले चार सालों में हुई मौत का विवरण
वर्ष - मृतक - रेफर
2015 - 184 - 973
2016 - 205 - 1724
2017 - 186 - 1609
2018 - 176 - 1199
2019 - 120 - 1300
2020 - 10 - 100
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बोले विधायक
>> प्रसव के बाद महिलाओं की मौत होना गंभीर है। सुविधाओं में विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र दिया जाएगा। संसाधनों की कमी को भी शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। - चंद्रा पंत, विधायक पिथौरागढ़।
>> जिले के बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं का मामला विधानसभा में उठाएंगे। लोगों को कोई दिक्कत न हो इसके लिए हमारी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार को प्रयासरत है। - मीना गंगोला, विधायक गंगोलीहाट।
>> महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत कराने को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। संसाधनों की कमी का मामला विधानसभा में उठाया जाएगा। - विशन सिंह चुफाल, विधायक डीडीहाट।
>> भाजपा सरकार में स्वास्थ्य, शिक्षा व्यवस्था हाशिए पर आ गई है। इस मामले को विधानसभा में उठा चुका हूं। अगर सुविधाएं जल्द नहीं सुधरी तो सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। - हरीश धामी, विधायक धारचूला।
बोले अधिकारी-
>> चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए लगातार पत्रचार किए जा रहे हैं। शीघ्र ही चिकित्सकों की नियुक्ति की उम्मीद है। - डॉ. उषा गुंज्याल, सीएमओ पिथौरागढ़।
>> निदेशालय को पत्र भेजा है। व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्त और आईसीयू में पदों को स्वीकृत कराने के लिए शासन को पत्र भेजा है। - डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, डीएम पिथौरागढ़।
लचर स्वास्थ्य सुविधाओं से नाराज लोगों ने फूंका मुख्यमंत्री का पुतला
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ जिला महिला अस्पताल में आए दिन गर्भवती महिलाओं की मौत पर लचर स्वास्थ्य सुविधाओं को जिम्मेदार ठहराते हुए देवलथल में मुख्यमंत्री का पुतला फूंका। प्रदर्शनकारियों ने महिला की मौत की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई।
देवलथल में पूर्व जिला पंचायत सदस्य जगदीश कुमार के नेतृत्व में लोगों ने मुख्य मंत्री का पुतला फूंका। इस अवसर पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि महिला जिला अस्पताल में आए दिन गर्भवती महिलाओं की मौत हो रही है। पिछले तीन माह में चार महिलाएं असमय मौत के मुंह में समां चुकी हैं। कहा कि महिलाओं की मौत पर कभी अस्पताल प्रबंधन मरीज का पानी पीना तो कभी हीमोग्लोबिन कम होना बताता है। जबकि महिलाओं की मौत का कारण डॉक्टरों की लापरवाही है।
कहा कि शनिवार को प्रसव के बाद दम तोड़ने वाली रिद्धिमा का जब हीमोग्लोबिन कम था तो उसे सघन चिकित्सा निगरानी में रखा जाना चाहिए था। कहा कि महिला मृत्यु दर रोकने के लिए तमाम प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं इसके बावजूद धरातल पर कोई काम नहीं होता है। सरकार स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा पाने में विफल साबित हो रही है।
वहां लोहाकोट के पूर्व प्रधान शंकर सिंह सामंत, सौगांव के पूर्व प्रधान पुष्कर राम, नरेश पांडेय, पूर्व सैनिक खीम सिंह बसेड़ा, दीपक सिंह सामंत, किशोर पांडेय, देवेंद्र टम्टा, होशियार सिंह आदि थे।
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सीमांत यूथ मोर्चा ने किया प्रदर्शन
पिथौरागढ़। जिला महिला अस्पताल में प्रसव के बाद महिलाओं की मौत की जांच को लेकर सीमांत यूथ मोर्चा ने प्रदर्शन किया। सीयूमो के अध्यक्ष सुशील खत्री के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने पिथौरागढ़ के गांधी चौक में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती सहित संसाधन बढ़ाने की मांग लगातार की जा रही है। इसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
उपाध्यक्ष सुरेश जोशी ने कहा कि डॉक्टरों की तैनाती नहीं की गई तो मोर्चा भूख हड़ताल करेगा। प्रदर्शन में शंकर राम, नवीन शर्मा, विनय भाटिया, नवीन आर्या, राजू जोशी, पप्पू लुंठी, विपिन पुनेड़ा, अमित कुमार, इरफान, हरीश, दिनेश, जगदीश आदि शामिल थे।
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