अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम के तहत रंग उमंग तरंग के पर्व होली पर कवियों ने अपनी रचनाओं से रंग और अबीर की बौछार की। इस अवसर पर महिला हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने को लेकर 50 से अधिक संकल्प पत्र भरे गए।
कवि सम्मेलन की शुरुआत करते हुए लक्ष्मी आर्या ने कहा अबकी होली में सो-निया हो रही उदास, कब खेले कैसे खेले होली किसके साथ। युवा कवि चंदन पानू ने होली आई होली आई जनमानष में खुशिया लाई, मित्रता का करो आगाज, दुश्मनी का हो तिरस्कार।
कुमाऊंनी कवि प्रकाश जोशी शूल ने होली में हुड़दंग न हो तो सब बेकार, होली में गर रंग न हो तो सब बेकार, होली सबके तनमन रंगती, होली में उमंग न हो तो सब बेकार। सामाजिक चिंतक डा.तारा सिंह ने होली का हुड़दंग बज उठे मृदंग, राष्ट्र को करे मजबूत अपराजिताओं के संग। शिक्षक मथुरा दत्त चौंसाली ने होली का यह त्योहार, बदल दे सबका व्यवहार, खुशियां भरा रहे संसार, आता रहे सदा यह त्योहार।
भावना कोरंगा ने राष्ट्रीय भावना का उत्सव है होली, रंगो की बौछार में सब बन जाते हमजोली। संचालन करते हुए युवा कवि एवं व्यंगकार ललित शौर्य ने गधों की याद में मूर्खों का सम्मान, गधा सदा से ही रहा मूर्खों की पहचान। वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ.परमानंद चौबे की अध्यक्षता में आयोजित कवि सम्मेलन में स्वामी गुरुकुलानंद सरस्वती कच्चाहारी, आशा मोहन, मिन्नी सिंह, अमित कश्यप, महेश भट्ट, तनूजा उप्रेती, सुनीता, गुंजन द्विवेदी, चंचल सिंह कोरंगा आदि मौजूद रहे।