धुंध के कारण अस्पष्ट दिख रही पंचाचूली की चोटियां
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उच्च हिमालयी क्षेत्र में धुंध अभी छंटी नहीं है। कई जंगलों में आग लगने के कारण धुआं वातावरण में फैल गया है। पिछले कई दिनों से हिमालय की चोटियां स्पष्ट दिखाई नहीं दे रही हैं। मदकोट क्षेत्र में तोमिक के जंगल में तीन दिन से लगी आग मंगलवार को आबादी में पहुंचने के बाद बुझ तो गई, लेकिन धुएं का असर कम नहीं हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहली बार इस मौसम में ऐसी विचित्र स्थिति देखने को मिली है। पिछले साल तक इस मौसम में एक-दो बार हिमपात हो जाता था और हिमालय की चोटियां साफ नजर आती थी।
बताया गया कि बारिश और बर्फबारी न होने के कारण इस बार जंगलों में आग का खतरा समय से पहले हो गया। उच्च हिमालयी क्षेत्र में चीन सीमा पर स्थित छियालेख और गर्ब्यांग के जंगलों में भी दो दिन तक भीषण आग लगी रही। आईटीबीपी ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन जंगलों में लगी आग का धुआं अब तक वातावरण से नहीं हटा है। लोगों का कहना है कि यदि बारिश और बर्फबारी हो जाती तो न जंगलों में आग लगती और न इतने दिनों तक धुंध का असर रहता।
वन रेंजर पीएस रौतेला और राजेंद्र सिंह बिष्ट का कहना है कि जंगलों में आग लगाने में किन लोगों का हाथ है, इसकी पड़ताल की जा रही है। वनकर्मियों की टीम प्रभावित इलाकों में पहुंच गई है। इधर, लोगों ने आशंका जताई है कि जंगलों में आग लगाने में शिकारियों का हाथ हो सकता है, लेकिन विभाग किसी को भी पकड़ने में कामयाब नहीं हुआ है। पंचाचूली, राजरंभा, छिपलाकेदार की पहाड़ियों पर बर्फ तो है, लेकिन वह मुनस्यारी और आसपास के इलाकों से धुंध के कारण स्पष्ट नजर नहीं आ रही हैं। लोगों का कहना है कि जब तक बारिश नहीं होती, धुंध का असर बना रहेगा।