की हिलजात्रा में सुख समृद्धि का प्रतीक हिरनचीतल मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। गल्या (आलसी) बैलों की जोड़ी का प्रदर्शन भी बेहतरीन रहा। कृषि से जुड़ा हिलजात्रा पर्व सोरघाटी (पिथौरागढ़) के प्रमुख पर्वों में शामिल है। भुरमुनी गांव में भी हिलजात्रा का पर्व हर साल धूमधाम से मनाया जाता है।
हिलजात्रा मैदान में ज्योंही हिरनचीतल का प्रवेश हुआ रोमांच से भरे लोग आराधना करने लगे। हलवाहक के साथ मैदान में आई गल्या बैलों की जोड़ी ने खेतों में हल चलाने का प्रदर्शन किया। अंत में राजा और पुतारी (धान रोपने वाली महिलाएं) मैदान में आती हैं। राजा प्रजा को खुशहाली की शुभकामना देते हैं। मान्यता है कि हिलजात्रा के आयोजन से इलाके में कृषि उपज बेहतर होती है।
मुख्य अतिथि पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष वीरेंद्र बोहरा हर साल भव्य तरीके से हिलजात्रा मनाने के लिए भुरमुनी के लोगों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे ही प्रयास और लगन से संस्कृति संरक्षण किया जा सकता है, ताकि भावी पीढ़ी तक संस्कृति पहुंचे और निरंतर आगे बढ़ती रहे। हिलजात्रा के जानकार कैप्टन दीवान सिंह वल्दिया ने लोगों को हिलजात्रा के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम को सफल बनाने में भूतपूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष ललित मोहन धानिक, बसंत खड़ायत, प्रधान मालती देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य शकुंतला देवी, खड़क सिंह, नारायण सिंह, कुंडल सिंह, हयात सिंह समेत तमाम लोगों ने सहयोग किया।