उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पिथौरागढ़ जिले में अस्पतालों का मेडिकल वेस्ट खुले में, नदी, नालों, गड्ढों और नगर पालिका के कूड़े के डिब्बों में डाले जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार व पीसीबी को एक सप्ताह के भीतर अतिरिक्त शपथपत्र पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने पीसीबी से कहा है कि जो मेडिकल वेस्ट की जांच की गई है उसे भी कोर्ट में पेश करें।मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
मामले के अनुसार पिथौरागढ़ निवासी डॉक्टर राजेश पांडे ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि पिथौरागढ़ जिले में मेडिकल वेस्ट का निस्तारण के लिए कोई सुविधा नहीं है, जिसकी वजह से सरकारी, प्राइवेट अस्पताल और पैथोलैब का मेडिकल वेस्ट इनकी ओर से खुले में, नदी, नालों, गड्ढों व नगर पालिका के कूड़े के डिब्बों में डाला जा रहा है, जिसकी वजह से बीमारी फैलने की आशंका बढ़ रही है। याचिका में कहा कि निस्तारण के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं है, इतना ही नहीं इस वेस्ट को जानवर भी खा रहे हैं, उनके स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
पिथौरागढ़ जिले में करीब 20 पैथ लैब संचालित है, लेकिन इनका यूकेपीसीबी यानी उत्तराखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में रजिस्ट्रेशन तक नहीं है, जिसकी वजह से पर्यावरण को भी खतरा उत्पन्न हो गया है, इसलिए इसके निस्तारण के लिए उचित व्यवस्था की जाए। याचिका में कहा कि जिले के सीएमओ ने भी स्वीकार किया है कि जिले में मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं है, जिसकी वजह उन्हें वेस्ट निस्तारण की समस्या का सामना करना पड़ रहा है और अन्य अस्पताल भी वेस्ट को इधर-उधर डाल रहे हैं। याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की गई कि पिथौरागढ़ राज्य का सीमांत जिला होने के कारण जिले में एक कॉमन मेडिकल वेस्ट सेंटर बनाने के आदेश राज्य सरकार को दिए जाए।