मुनस्यारी के हरकोट में गारगोठ की पुलिया क्षतिग्रस्त होने से जान जोखिम में डालकर गुजरते लोग
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एक-दो जुलाई की अतिवृष्टि ने जैविक सब्जियों के लिए प्रसिद्ध हरकोट को गहरे जख्म दिए हैं। आवागमन के लिए बनी पांच पुलिया क्षतिग्रस्त होने से गांव के लोग मुसीबत में हैं। इसी गांव का किशन राम पुत्र खीम राम दो जुलाई को नाली में बह गया था, अब तक उसका कोई पता नहीं चला है। मदकोट के वल्थी में भी तबाही मची है। लोदीबगड़ में 6 मकान खतरे में आए हैं। कई क्षेत्रों में अब तक आवागमन सुचारु नहीं हुआ है।
हरकोट को जोड़ने वाली गागोठी और गोनमुडी गधेरे पर बनी पुलिया के साथ ही सुपलागाड़, डिमोरीगाड़, भराड़ी मंदिर के पास बनी पुलिया दो अगस्त को क्षतिग्रस्त हो गई थी। यह गांव सब्जी उत्पादन के साथ दुग्ध उत्पादन के लिए भी जाना जाता है। दो जुलाई के बाद से गांव के लोग मुनस्यारी बाजार में सब्जी और दूध नहीं ला पा रहे हैं। हरकोट गांव के लोग जान जोखिम में डालकर गधेरा पार कर रहे हैं। जंगल के खतरनाक रास्ते से इन लोगों को चलना पड़ रहा है। हरकोट के तोक मालूपाती, मटेना, रीठा भी अलग-थलग पड़े हैं। ग्राम प्रधान खुशाल सिंह जेष्ठा ने बताया कि मालूपाती और रीठा के 10 परिवारों के मकान खतरे की जद में आने से उनको अन्यत्र ठहराया गया है। पूर्व सरपंच शेर सिंह नेगी का कहना है कि पूरा गांव खतरे में आ गया है, सुरक्षा के उपाय जल्द होने चाहिए।
मदकोट के वल्थी में लक्ष्मण सिंह के मकान तक भूस्खलन हो गया है। मकान कभी भी गिर सकता है। इस परिवार ने अन्यत्र शरण ले रखी है। सेराघाट के पास लोदी बगड़ में 6 मकान खतरे की जद में आ गए हैं। इन लोगों ने मकान खाली कर दिए है। सामाजिक कार्यकर्ता हीरा चिराल का कहना है कि सरकार को भरपाई के लिए प्रयास तेज करने होंगे।
बच्चों को स्कूल से अवकाश देने के निर्देश
पिथौरागढ़। ग्राम प्रधान खुशाल सिंह जेष्ठा ने तहसीलदार डॉ. ललित मोहन तिवारी के समक्ष रास्ते और पुलिया ध्वस्त होने से स्कूल के 20 बच्चे के स्कूल नहीं जा पाने का मामला उठाया। तहसीलदार ने रास्ते ठीक होने तक हरकोट के बच्चों को स्कूल से अवकाश देने के निर्देश खंड शिक्षाधिकारी को दिए हैं।
ग्रामीणों ने खुद बनाया रास्ता
पिथौरागढ़। मुनस्यारी के बाता गांव को जोड़ने वाला 1.5 किमी पैदल रास्ता दो जुलाई की अतिवृष्टि में पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था। रास्ते में मलबा पट गया। जब सरकारी मशीनरी मदद को नहीं आई तो गांव के बहादुर सिंह कोरंगा, आनंद सिंह कोरंगा, रुद्र सिंह, प्रेम सिंह, नरेंद्र भंडारी आदि ने स्वयं ही मलबा हटाकर चलने लायक रास्ता तैयार कर लिया। गांव के लोगों ने बताया कि पेयजल योजना क्षतिग्रस्त होने से गांव में पानी की किल्लत बनी हुई है।