स्वास्थ्य शिविर खासकर महिला रोगियों के लिए मजाक बन गया है। शिविर में महिला रोग से जुड़ा कोई विशेषज्ञ मौजूद नहीं होता है, जिससे महिलाएं रोग के संबंध सलाह और दवा ले सके। यही हाल, अल्ट्रासाउंड जैसी जांच सुविधाओं का है। रोगियों के अनुसार यह जांच भी अक्सर नहीं हो पाती है।
जैन वीडियो ऑन व्हीकल सेवा विभिन्न जगहों में जाकर मरीजों का इलाज करती है। सात महीने तक बंद रहने के बाद नवंबर 2014 में दुबारा शुरू हुई। इस महीने चमदेवल, पुल्ला, दिगालीचौड़, रौसाल, तामली, मंच, चंपावत, देवीधुरा और आज मूलाकोट में शिविर लगा।
इन शिविरों में 340 लोग आए। लेकिन इलाज के नाम पर मरीजों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। अल्ट्रासाउंड मशीन होने के बावजूद अल्ट्रासाउंड परीक्षण नहीं हो सके। इलाज को आए पुष्कर दत्त, मंजू जोशी सहित कई लोगों का कहना था कि उनका अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका।
महिला डाक्टर नहीं होने से महिला संबंधी रोगों की भी जांच नहीं हो सकी। इस सेवा में डॉक्टर भी तीन के बजाय एक ही थे। बस खून की जांच, एक्सरे और ईसीजी हो सका।