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मुख्यमंत्री ने निभाया घराती का रोल

Tue, 08 Dec 2015 10:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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मुख्यमंत्री हरीश रावत मंगलवार को मदकोट में अलग अंदाज में दिखे। मौका उनके बेहद करीबी उत्तराखंड वन विकास निगम के अध्यक्ष हरीश धामी की सुपुत्री की विवाह का था। न सुरक्षा इंतजामातों की वैसी हड़बड़ी दिखी और न नेताओं, अफसरों से मुख्यमंत्री घिरे रहे। करीब डेढ़ घंटे तक आयोजन स्थल पर रुके रावत ने दुल्हन पक्ष का मुखिया बनते हुए दूल्हा पक्ष को बधाई दी, व्यंजनों का खुद भी आनंद लिया औरों को भी खिलाया। दौरे में राजनीति, सियासत की बात तो नहीं हुई, मडुवा की रोटी और पालक के साग का स्वाद लेते-लेते भी मडुवा, गहत पर चर्चा छेड़ ही दी। मडुवा, गहत, झिंगूरे की खीर का खुद पर परीक्षण करने की बात मुख्यमंत्री ने कही।
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मंगलवार की सुबह से गोरी और मंदाकिनी नदी के किनारे बसा मदकोट कस्बा लोगों की आवाजाही से गुलजार था। पूर्व विधायक एवं उत्तराखंड वन विकास निगम के अध्यक्ष हरीश धामी और दीपा धामी की सुपुत्री पूजा का विवाह प्रयाग सिंह ढोक्टी के सुपुत्र बलवंत सिंह ढोक्टी निवासी बसंतकोट (मुनस्यारी) हाल निवासी बनबसा के साथ संपन्न हुआ। विवाह में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी शिरकत की।
मुख्यमंत्री ने विवाह स्थल पर पहुंचकर वर पक्ष के लोगों से मुलाकात की। विवाह समारोह में आए हुए लोगों के साथ मुलाकात करते हुए सीएम विवाह मंडप में महिलाओं के साथ बैठ गए, उनसे बतियाए, हालचाल जाने। फिर कपकोट के विधायक ललित फर्स्वाण, कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री पालिकाध्यक्ष जगत सिंह खाती और अन्य लोगों ने सीएम से भोजन पंडाल में चलने का आग्रह किया। भोजन पंडाल में भी मुख्यमंत्री पूरी तरह घराती (वधू पक्ष) की तरह लोगों से व्यवहार करते दिखे। लोगों को दही बड़ा, जलेबी, हलुवा खिलाते रहे और थोड़ा-थोड़ा खुद भी खाते रहे। भोज्य पदार्थ बनाने वाले कारीगरों की तारीफ भी मुख्यमंत्री ने की।
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इसके बाद मुख्यमंत्री ने विशुद्ध कुमाऊंनी व्यंजनों का लुत्फ उठाया। उन्होंने बड़े चाव से मडुवा की रोटी, गहत की दाल, पालक की सब्जी खाई। मुख्यमंत्री ने लंच पर मडुवा, गहत आदि पर चर्चा ही छेड़ दी। साथ में बैठे विधान सभाध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा, विधायक ललित फर्स्वाण, विधायक मनोज तिवारी, कांग्रेस प्रदेश महामंत्री जगत सिंह खाती, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत और पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि मडुवा गर्भस्थ नारी और शिशु में आयरन की कमी पूरी करता है। 50 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए मडुवे की रोटी, पालक की सब्जी, गहत की दाल, काले भट्ट की दाल, झिंगूरे की खीर अचूक दवा है। इनके सेवन से हड्डियां ठीक हो जाती हैं। उन्होंने खुद पर इसका परीक्षण किया है, भारी लाभ मिला है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गांव में बुजुर्ग महिलाओं को देखा है, वह 50-60 किलो की घास, लकड़ी से भरी डलिया लेकर भागती हैं, यह सब इन्हीं अनाजों की ताकत है। उन्होंने कहा कि वह मडुवा, गहत आदि पर लगातार फोकस कर रहे हैं। इसका असर भी देखने को मिल रहा है। विवाह आदि आयोजनों में परंपरागत भोजन बनने लगा है। मुख्यमंत्री ने भोजन के बाद 25 मिनट विवाह उत्सव में चल रहे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का लुत्फ उठाया, कलाकारों को शाबासी दी। मंडप में पहुंचकर दूल्हे बलवंत को आशीर्वाद दिया। अलग अंदाज में दिख रहे मुख्यमंत्री मदकोट बाजार में पैदल घूमे और दोपहर तीन बजे लोगों से मिलते-मिलाते हेलीकाप्टर से देहरादून रवाना हो गए।
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