मोस्टामानू में इस वर्ष पहली मार्च को मिली अनजान महिला अब खुद को आगरा के खड़ोधर की निवासी बताती है और पति का नाम उसने ईश्वरी प्रसाद बताया है। उसके हाथ में भूरी देवी नाम गुदा हुआ है। हालांकि 13 फरवरी को देवलथल में मिली एक अन्य अनजान महिला के साथ ही भूरी देवी की खोजबीन के लिए अब तक उनके परिजन ने संपर्क नहीं किया है। माना जा रहा है कि केदारनाथ प्रलय को करीब से देखने के बाद इन महिलाआें को मानसिक आघात पहुंचा होगा और भटकते हुए इस इलाके में आ गई हाेंगी।
निराश्रित महिला केंद्र में इन दोनों महिलाओं की असामान्य हरकतों से कर्मचारी खासे परेशान हैं। देवलथल में मिली महिला अब भी हर वक्त गुमसुम रहती है। कभी वह खेत की घास को उखाड़ने चल देती है। यदि उसका मूड खराब हो गया तो वह पत्थर पकड़कर लोगों को मारने चल देती है। अब तक इस महिला ने किसी भाषा को सीखने का कोई प्रयास नहीं किया है। उसके मुंह से कोई भी ऐसा शब्द नहीं निकलता जिसे समझा जा सके। वह दक्षिण या पश्चिम भारत की लग रही है। उसकी उम्र करीब 42 साल है।
उधर, मोस्टामानू में मिली महिला के हाथ में ही भूरी देवी नाम गुदा हुआ है। वह कई बार निराश्रित महिला केंद्र से भागने की कोशिश कर चुकी है। यह महिला हिंदी बोल लेती है। वह खुद को आगरा के खड़ोधर का रहने वाली बताती है। वह बार-बार घर जाने की बात करती है। एक दिन तो उसने केंद्र की रेलिंग फांदकर भागने का प्रयास किया था। निराश्रित महिला केंद्र की प्रभारी नेत्रा जोशी कहती हैं कि दोनों महिलाएं असामान्य स्थिति में हैं। अब तक किसी ने भी उनके संबंध कोई संपर्क नहीं किया है। वह कहती हैं कि इन महिलाओं के केदारनाथ से भटकने का कोई प्रमाण नहीं मिला है।