बस्तड़ी में कई मौतें होने के बाद प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ है, लेकिन इस घाटी में दर्जनों प्रभावित गांवों तक अभी कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा है। तल्लाओझा गांव की प्रधान मंजू ओझा और जिला पंचायत सदस्य जमुना लोहिया ने प्रभावित गांवों का दौरा करने के बाद बताया कि आपदा से लोगों के घर टूट गए हैं और कृषि योग्य जमीन तबाह हो गई है। सौभाग्य से इन इलाकों में किसी की जान नहीं गई, लेकिन भय और दहशत का माहौल बना हुआ है।
प्रधान ने बताया कि तल्लाओझा गांव में टीकाराम, मदनमोहन ओझा, पुष्कर सिंह, नैनराम, त्रिलोक राम, नारायणराम, धनीराम, मोतिमा देवी, केशर राम, नरेंद्र सिंह, सुंदर सिंह, गोविंदी देवी, हयात सिंह, त्रिलोचन ओझा, चारू चंद्र, चंद्रराम, देवेंद्र राम, पद्म राम, जोहार सिंह, विमला देवी, गगन सिंह, दीवान सिंह, कल्याण सिंह, जगदीश सिंह का मकान ध्वस्त हो गया है। इसके अलावा सिन्याड़ी, ढुंगालगांव, पथरौली, जेठीगांव, भागीचौरा, पस्मा, डुंगरा, चौखाल, नागताल, बाराकोट में भी तबाही हुई है। पानी की लाइन, रास्ते सब टूट गए हैं।
लामाघर, बगजिबला में भी हालत खराब
डीडीहाट के विधायक विशन सिंह चुफाल ने लामाघर, बगजिबला, सिलफर, बुदीगैर, ननपाभे गांव का दौरा करने के बाद बताया कि इन गांवों में भारी तबाही मची है। हर मकान को खतरा हो गया है। कुछ परिवारों ने दूसरी जगह शरण ले रखी है। उन्होंने प्रशासन की बदइंतजामी पर गहरी नाराजगी जताई और तत्काल गांवों में टीम भेजने को कहा। उन्होंने प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री भेजने को भी कहा है।