सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने भारत-चीन सीमा पर लिपुलेख दर्रे के निकट नाभीढांग में डोंगांग नाले पर 160 फीट लंबे वैली ब्रिज का निर्माण कर दिया है। चीन सीमा पर गुंजी से आगे सामरिक महत्व की छियालेख से नाभीढांग तक 30 किमी सड़क भी बनकर तैयार हो गई है। इससे अब नाभीढांग तक वाहनों से पहुंचा जा सकेगा। बता दें कि नाभीढांग से ऊं पर्वत तक सिर्फ 12 किमी पैदल रास्ता है।
सीमा सड़क संगठन के कमान अधिकारी मेजर मनीष नारायण न बताया कि 14500 फीट की ऊंचाई पर स्थित नाभीढांग तक हेलीकॉप्टर से पुल निर्माण की सामग्री भेजी गई। इस समय वहां का तापमान शून्य डिग्री से नीचे रहता है। ऐसे विषम हालातों में बीआरओ के जवानों और इंजीनियरों ने रात दिन कठिन परिश्रम कर समय रहते निर्माण कार्य को पूरा कर लिया है।
बता दें कि बीआरओ ने भारत-चीन सीमा पर जुलाई 2015 से अभी तक पांच मोटर पुलों का निर्माण पूरा कर लिया है। इनमें गुंजी गांव के पास कुटी यांगती नदी पर 130 फीट लंबा पुल, कालापानी में मर्तीती नाले पर 100 फीट लंबा पुल, कालापानी में ही 100 फीट लंबा दूसरा पुल, नाभीढांग नाले पर 10 फीट का प्रथम पुल तथा वर्तमान में 160 फीट लंबा डोंगाग नाले पर बनाया गया पुल प्रमुख हैं। इन पुलों के बन जाने से छियालेख से नाभीढांग तक सीमांत का क्षेत्र 30 किमी सड़क से जुड़ गया है।
इससे भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों के साथ ही स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही कैलाश मानसरोवर यात्रियों को भी खासी राहत मिलेगी।