गुंजी में कुटी यांगती नदी से पानी लेकर आते ग्रामीण
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कैलाश मानसरोवर यात्रा के प्रमुख पड़ाव और भारत-तिब्बत व्यापार की मंडी गुंजी में इन दिनों गंभीर पेयजल संकट पैदा हो गया है। गुंजी में रहने वाले लोग कुटी यांगती नदी का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। बताया गया कि हिमपात के कारण कई स्थानों पर पेयजल लाइन जम गई है। इस कारण पानी नहीं चल पा रहा है। इस बार दिसंबर से ही पेयजल का संकट पैदा हो गया था।
गांव के लोगों ने बताया कि पेयजल लाइन को पूरा खोलना पड़ेगा और बर्फ से बंद पड़ी लाइन को जब तक चालू नहीं किया जाएगा, पानी की सप्लाई सुचारु नहीं हो सकती। गुंजी में इस समय सुरक्षा बलों के जवान रहते हैं और माइग्रेशन पर न जाने वाले कई ग्रामीण भी गांव में ही रहते हैं। गुंजी की प्रधान अर्चना देवी ने बताया कि पेयजल सप्लाई ठप होने की जानकारी जल संस्थान के अधिशासी अभियंता बिलाल यूनुस को काफी पहले दी जा चुकी है। इस समय गुंजी के आसपास के इलाकों में भारी मात्रा में बर्फ जमा है। कुटी यांगती नदी में पानी गंदा रहता है। नलों में पानी न आने के कारण लोगों को नदी से अपने पीने और जानवरों के लिए पानी का इंतजाम करना पड़ रहा है।
गुंजी के सामाजिक कार्यकर्ता कुलदीप गर्ब्याल ने शुक्रवार को तहसील मुख्यालय आकर एसडीएम आरके पांडे और तहसीलदार आईबी मल्ल को समस्या की जानकारी दी। एसडीएम ने जल संस्थान के अधिकारियों को तत्काल पेयजल सप्लाई सुचारु करने को कहा। गुंजी तक कर्मचारियों के पैदल पहुंचने में तीन दिन का समय लग जाता है। अगले महीने से गुंजी की तरफ ट्रैकरों की आवाजाही भी बढ़ने लगती है। यदि तब तक पेयजल व्यवस्था में सुधार नहीं आया तो मुसीबत और बढ़ जाएगी।
डीडीहाट में अभी से पेयजल किल्लत शुरू
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। इस बार डीडीहाट नगर में अभी से पानी का संकट गहरा गया है। जल संस्थान नगर के लोगों को दिन में सिर्फ एक समय ही पानी का वितरण कर पा रहा है। मार्च से संकट ज्यादा गहराने की आशंका है। पिछले वर्षों तक जल संस्थान अमूमन अप्रैल से नगर में एक समय पानी वितरित करता था, परंतु इस बार फरवरी से ही एक समय पानी की आपूर्ति होने से नगर में पानी का संकट गहरा गया है। लोगों को अभी से पानी के लिए नौले-धारों का रुख करना पड़ रहा है। पानी की सप्लाई न होने से लोगों में जल संस्थान के प्रति आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता बिलाल यूनुस ने कहा कि इस बार की आपदा से नगर को पानी देने वाले प्राकृतिक स्रोतों को काफी नुकसान हो गया था। उन स्रोतों को सही करने का काम किया जा रहा है और जाड़ों में बारिश ज्यादा न होने से पानी की कमी होने लगी है। स्रोतों की मरम्मत का काम होने के बाद नगर के लोगों को दिन में दो बार पानी देने का प्रयास किया जाएगा।