गुंजी के जंगलों में लगी आग पर काबू पा लिया गया है। आग को आबादी की ओर बढ़ने से पहले ही रोक दिया गया। जिलाधिकारी डा. रंजीत सिन्हा के आग्रह पर आईटीबीपी, एसएसबी और बीआरओ के जवानों ने आग बुझाने का प्रयास किया। स्थानीय लोगों ने भी आग बुझाने में मदद की।
आग लगने के कारणों की जांच वन विभाग की टीम करेगी। क्योंकि शीतकाल में इतनी प्रचंड आग के फैलने से सभी लोग आश्चर्य में हैं। आशंका जताई जा रही है कि आग शिकारियों ने लगाई होगी। एसडीएम आरके पांडे ने कहा कि आग लगने के कारणों की जांच के लिए वन विभाग की टीम को रवाना किया जाएगा। ठीक इसी तरह की आग मुनस्यारी तहसील में पंचाचूली की तलहटी पर भी लगी थी, लेकिन वहां तक आग बुझाने के लिए अब तक कोई महकमा नहीं पहुंच पाया। यह आग अब भी कुछ इलाकों में लगी है। इधर, लंबे समय से बारिश न होने के कारण जंगलों में आग का खतरा बढ़ रहा है। यदि शीतकाल में अच्छी बारिश नहीं हुई तो इस बार दावाग्नि का प्रकोप ज्यादा होने की आशंका है।
छिपलाकेदार के जंगलों में भी आग लगी
अस्कोट। छिपलाकेदार के जंगलों में भी आग लगी है। तीन-चार स्थानों पर शनिवार रात से लगी आग ने काफी बड़े दायरे को अपनी चपेट में ले लिया है। वन रेंजर केआर टम्टा ने बताया कि छिपलाकेदार के जंगलों में लगी यह आग मुनस्यारी की तरफ से पहुंची है। उन्होंने कहा कि टीम को मौके पर भेजा जा रहा है। यह पता लगाया जाएगा कि आग लगाने में शिकारियों का हाथ तो नहीं है।