उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में वड्डा कस्बे के पंत्यूड़ी गांव से छह बरातियों को लेकर दूल्हा नेपाल के गुरुखोला गांव पहुंचा। भारतीय और नेपाल प्रशासन की स्वीकृति के बाद बरात के लिए पुल खोला गया।
शनिवार को वड्डा कस्बे के पंत्यूड़ी गांव निवासी चिंतामणी भट्ट पुत्र विष्णु भट्ट की शादी में छह बराती शामिल हुए। दूल्हा बरात लेकर झूलाघाट पहुंचा, यहां अनुमति पत्र दिखाने के बाद पुल खोला गया। चिकित्सा विभाग की टीम ने सभी बरातियों की जांच की।
इसके बाद बरात ने नेपाल को प्रवेश किया। नेपाल पुलिस ने भी बरातियों की जांच की। बरात नेपाल के बैतड़ी जिले के गुरुखोला पाली रवाना हुई। रात सात बजे नेपाल से दुल्हन अंबिका भट्ट लेकर बरात झूलाघाट पहुंची। यहां चिकित्सकीय जांच के बाद बरात ने भारत में प्रवेश किया। दूल्हा चिंतामणि भट्ट, दूल्हे के पिता विष्णु दत्त, भाई नागेंद्र भट्ट, वासुदेव भट्ट, अनिल कुमार भट्ट, रमेश भट्ट मौजूद रहे।
नेपाल से भारत शादी में शामिल होने आया परिवार
नेपाल से एक परिवार शादी में शामिल होने के लिए भारत आया। अंतरराष्ट्रीय झूलापुल पर एसएसबी और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सीमाइल बैतड़ी नेपाल निवासी योगेंद्र बहादुर चंद, इंद्रा चंद, प्रिंसी चंद, राइन चंद, आयुष चंद की जांच की।
नेपाली पेंशनरों के लिए पांच दिन खुलेगा अंतरराष्ट्रीय झूलापुल
नेपाली पेंशनरों के लिए सोमवार 23 नवंबर से 27 नवंबर शुक्रवार तक झूलाघाट स्थित अंतरराष्ट्रीय झूला पुल खोला जाएगा। एसडीएम सदर तुषार सैनी ने बताया कि नेपाली पेंशनरों के लिए पांच दिन तक झूलापुल खोला जाएगा। इस बार नेपाल से आने वाले पेंशनरों को सामान खरीदने की छूट भी दी गई है। पिछली बार तक उन्हें झूलाघाट मंडी से सामान खरीदने की अनुमति नहीं थी। पांच दिन के लिए झूलापुल खुलने से आर्थिक नुकसान झेल रहे झूलाघाट के व्यापारियों के साथ-साथ सीमा पार नेपाल के व्यापारियों को भी राहत मिलेगी। व्यापारी लंबे से पुल को खोलने की मांग कर रहे थे।
सभी नाकों पर निश्चित समय के लिए खोला जाए पुल
महाकाली की आवाज के संयोजक शंकर खड़ायत ने पांच दिन के लिए नेपाली पेंशनरों के लिए झूलापुल खोलने के निर्णय की सराहना की है। उन्होंने भारत सरकार से सीमा नाकों को निश्चित समय के लिए खोलने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भारतीय क्षेत्र में रह रहे कई गांवों के लोगों के कुलदेवता के मंदिर नेपाल में हैं। लोग पूजा-अर्चना करने के लिए पिछले आठ माह से नेपाल नहीं जा पाए हैं, उन्हें भी पूजा-अर्चना के लिए नेपाल जाने की अनुमति दी जाए।