शहीद गोकर्ण के बचपन के सहपाठी तारा सिंह चुफाल प्राथमिक विद्यालय नापड़ में शिक्षक हैं। उत्तराखंड पुलिस में कार्यरत नरेंद्र चुफाल और कमल चुफाल गोकर्ण की शहादत से
काफी दुखी हैं। उन्होंने कहा कि गोकर्ण ने देश के लिए अपना बलिदान दे दिया है। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
गोकर्ण भी पिता भी सेना में थे कार्यरत
सीमा पर शहीद हुए गोकर्ण के पिता स्व. गंगा सिंह चुफाल भी सेना में कार्यरत थे। गंगा सिंह की मृत्यु दो साल पहले हो गई थी। गोकर्ण दो साल पहले ही काठगोदाम से पोस्टेड होकर उड़ी सेक्टर गए थे। शुक्रवार की शाम 7.30 बजे सबसे पहले गोकर्ण के मित्र कुंदन चुफाल को उनकी शहादत की खबर मिली।
शहीद के गांव में नहीं है संचार सुविधा
सीमांत जिला पिथौरागढ़ वीरों की भूमि रही है। देश की सुरक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले इन गांवों का आज भी कोई सुधलेवा नहीं है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि थल के नापड़ गांव में आज तक संचार सुविधा नहीं है। नापड़ गांव में मोबाइल के सिग्नल नहीं आते हैं। ग्रामीणों को घरों से दूर ऊंचाई पर जाकर मोबाइल से संपर्क करना पड़ता है।