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पिथौरागढ़ में उल्लास से मनाया हरेला पर्व

Sat, 16 Jul 2016 10:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़/डीडीहाट
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डीडीहाट में हरेला काटने की तैयारी करता एक परिवार - फोटो : अमर उजाला
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जिले में हरेला का पर्व शनिवार को उल्लास के साथ मनाया गया। हर घर में महिलाओं के आशीष वचन के तौर पर लाग हरेला, लाग बग्वाई, जी रये, जागि रये, शब्द गूंजते रहे। सुबह हर घर में साफ, सफाई, लिपाई, पुताई के बाद सबसे पहले देवताओं को हरेले के तिनके अर्पित किए गए और भोग लगाया। बाद में इन तिनकों पर परिवार के सभी सदस्यों के सिर का पूजन किया गया। हरेला के लिए विशेष पकवान तैयार किए जाते हैं। सिंहल, पुए, खीर इसमें खास होती है।
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घंटाकरण स्थित शिव मंदिर के पुजारी आनंदबल्लभ जोशी ने बताया कि सुबह उन्होंने करीब 200 लोगों को हरेले के तिनकों का वितरण किया। उन्होंने कहा कि मंदिर से हरेले के तिनके बांटने की यह परंपरा काफी पुरानी है। मंदिर में हर साल हरेला उगाया जाता है और भक्तों को प्रसाद के तौर पर बांटा जाता है। ग्रामीण अंचलों में हरेला को लेकर खास उत्साह देखा गया। ससुराल में रहने वाली बेटियां आज मायके पहुंचने का प्रयास करती हैं और मायके वालों के सिर का पूजन करती हैं। डीडीहाट में हरेला पर्व परंपरागत उल्लास के साथ मनाया गया। 

हरेला पर्व पर कोई वैदिक अनुष्ठान नहीं होता
पिथौरागढ़। हरेला का त्योहार बेहद सादगी भरा होता है। इसमें किसी प्रकार का वैदिक अनुष्ठान नहीं होता, यदि आवश्यक हुआ तो गणेश पूजन कर देवताओं की स्तुति की जाती है। भोग लगाने का मंत्र पढ़कर देवताओं को प्रसाद चढ़ाया जाता है। यदि कोई ऐसा न करे तब भी हरेला की परंपरा का निर्वाह हो जाता है। इसमें सिर्फ आशीर्वचनों का ही भाव निहित होता है। यह सुख, समृद्धि की कामना का प्रतीक है। पंडित आनंद बल्लभ जोशी बताते हैं कि कुमाऊं में प्रचलित वार्षिक व्रत पूजा पद्धति में हरेला पर्व के लिए किसी तरह की पूजा का विधान नहीं दिया गया है।
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