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राजपत्रित अधिकारी भी बैंकों की कतार में

Sun, 11 Dec 2016 09:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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बंद पड़ा स्टेट बैंक का एटीएम - फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के कारण निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोग तो प्रभावित हैं ही उच्च आय वर्ग वाले भी इसी तरह की समस्या से जूझ रहे हैं। बैंकों से राजपत्रित स्तर के अधिकारियों को भुगतान नहीं मिल पा रहा है। एटीएम की कतार में खड़े रहने के बाद भी उनको निराश लौटना पड़ रहा है।
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राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्राध्यापकों, असिस्टेंट प्रोफेसर और संविदा प्राध्यापकों का 80 का स्टाफ है, जबकि बैंक में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को मिलाकर 150 से ज्यादा संख्या पहुंचती है। प्राध्यापकों का वेतन हर महीने 50 हजार से लेकर 1.50 लाख तक होता है। बैंक में हर प्राध्यापक का वेतन महीने की शुरुआत में आ गया, लेकिन अब बैंक की लाइन और एटीएम की लाइन में लगकर भी पैसा नहीं मिल पा रहा है। कॉलेज का हर कर्मचारी और प्राध्यापक पैसे के लिए परेशान है। बैंक इस समय भुगतान के तौर पर अधिकतम छह हजार रुपए थमा रहा है, जबकि कई प्राध्यापकों के मकान का किराया ही छह हजार रुपए से अधिक बैठता है।

ठीक इसी तरह कृषि विज्ञान केंद्र में कार्यरत पांच वैज्ञानिकों और चार अन्य कर्मियों के सामने भी भुगतान की समस्या आ गई है। वैज्ञानिकों का भी महीने के प्रथम सप्ताह खाते में वेतन की रकम पड़ चुकी थी, लेकिन उसकी निकासी कैसे की जाए यह बड़ी समस्या हो गई है। कृषि विज्ञान केंद्र के सभी वैज्ञानिक एवं कर्मचारी किराए के मकानों में रहते हैं। बैंकों ने नोटबंदी के बाद भुगतान की लिमिट तय कर दी है। इसके अलावा बैंकों में कैश न होने के कारण भी ज्यादा रकम नहीं मिल पा रही है।
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वेतन लेने के लिए याचक जैसी स्थिति
राजकीय महाविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डा. अजय शुक्ल का कहना है कि प्राध्यापकों को बैंकों में याचक की तरह खड़ा रहना पड़ता है। इस समय तो नोटबंदी का असर है, लेकिन सामान्य दिनों में भी प्राध्यापकों को बैंकों में कठिनाई झेलनी पड़ती है। इस मामले को कई बार बैंक के प्रबंधकों के सामने भी रखा गया लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। 

पैसे निकालने में समय हो रहा बर्बाद
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. आरके सिंह का कहना है कि बैंकों से पैसा निकालने में समय बर्बाद हो रहा है। उसके बाद भी समस्या हल नहीं हो रही है। मकान मालिक चेक से किराए की राशि लेने से इनकार कर रहे हैं। घर के लिए दूध, सब्जी, राशन जैसी सामग्री जुटाने के लिए पैसा नहीं है। वह कहते हैं कि भुगतान की राशि बढ़ाई जाए। 

कॉलेज में खोली जाए बैंक की शाखा
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राध्यापकों और कर्मचारियों ने कॉलेज परिसर में बैंक की शाखा खोलने की मांग उठाई है। कॉलेज के विद्यार्थियों की फीस के ही 70 लाख रुपए नगर के विभिन्न बैंकों में जमा करने पड़ते हैं। इसके अलावा वेतन के रूप में हर महीने बड़ी रकम बैंकों में आती है। यदि कॉलेज में बैंक की शाखा खुल जाए तो इसका फायदा स्टाफ और विद्यार्थियों को मिलने लगेगा। कॉलेज की तरफ से इस आशय का प्रस्ताव लीड बैंक अधिकारी को दिया गया है।

कई एटीएम में पैसा हो गया समाप्त
नगर के अधिकांश एटीएम में शनिवार की रात ही पैसा समाप्त हो गया है। सोमवार को भी बैंक बंद रहेंगे। इस कारण लोगों की समस्या ज्यादा बढ़ने लगी है। अब तक यहां एटीएम सुचारु ढंग से संचालित नहीं हो पाए हैं। यदि एटीएम में पैसा पड़ा तो वह कुछ घंटे में ही समाप्त हो जाता है, क्योंकि पैसा पड़ते ही लोगों की कतार लग जाती है।

अब तक नहीं पहुंचा 500 का नया नोट
नोटबंदी को एक माह से अधिक समय हो गया है, लेकिन सीमांत जिले के बैंकों में अब तक 500 का नया नोट नहीं पहुंचा है। लोगों का कहना है कि केंद्र सरकार ने नोटबंदी के दस दिन के भीतर हालात सामान्य होने का दावा किया था। साथ ही नई करेंसी जल्दी से बैंकों में पहुंचाने की बात की थी, लेकिन इस जिले में अब तक रिजर्व बैंक से सीधे कैश नहीं आया है।
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