मदकोट के गैला पत्थरकोट में क्षतिग्रस्त मकान के मलबे से सामान ढूंढते लोग।
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आपदा के चार दिन बीतने के बाद भी सरकारी तंत्र कई इलाकों में प्रभावितों तक नहीं पहुंच पाया है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण बंगापानी तहसील के गैला पत्थरकोट ग्राम पंचायत में देखने को मिला है। गैला पत्थरकोट में दो जुलाई को छह लोगों के मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे। यह सभी परिवार घर से आधा किमी दूर टैंटों में रह रहे हैं। घर का सामान, राशन मकान के मलबे में दब गया। चार दिन बीतने के बाद भी आपदा प्रभावितोें को सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिली। इन लोगों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है।
मदकोट से 22 किमी दूर गैला पत्थरकोट में भी सोमवार की आपदा ने गहरे जख्म दिए। बारिश के दौरान जगदीश कुमैय्या, प्रेम सिंह दानू, जयंती देवी, भूपेंद्र दानू, लक्ष्मण कुमैय्या, उत्तम दानू के मकान ध्वस्त हो गए। घर में रखा सारा सामान मलबे में दब गया। मकान ढहने से पूर्व घर के लोग सतर्कता बरतते हुए सुरक्षित स्थानों में चले गए, इस कारण उन लोगों की जान बच गई। प्रभावितों ने घर से करीब आधा किमी दूर भैंसखाली में अपने पास मौजूद पुराने तिरपाल, और प्लास्टिक सीट से टैंट बनाए। पिछले चार दिनों से यह परिवार इन्हीं टैंटों में रह रहे हैं। आपदा प्रभावितों ने बताया कि चार दिन बीतने के बाद भी उन लोगों की सुध लेने सरकार का कोई नुमाइंदा नहीं पहुंचा। उन लोगों के पास राशन भी समाप्त होने जा रहा है।
शुक्रवार तक मदद न पहुंची तो देंगे धरना
पिथौरागढ़। गैला पत्थरकोट का भ्रमण कर लौटे एनएसयूआई के मुनस्यारी ब्लाक अध्यक्ष विक्रम दानू ने बताया कि अपने घर, सामान से हाथ धो बैठे आपदा प्रभावितों की स्थिति दयनीय है। उन लोगों के पास राशन भी समाप्त हो गया है। गांव के लोगों की मदद से वह लोग भोजन कर पा रहे हैं। कहा कि घटना के दिन ही बंगापानी तहसील और मदकोट स्थित कंट्रोल रूम में सूचना दे दी गई थी। बृहस्पतिवार की दोपहर तक गांव में सरकारी अमला नहीं पहुंचा था। उनका कहना है कि शुक्रवार तक प्रभावितों को मदद नहीं मिली तो तहसील कार्यालय में धरना दिया जाएगा।
क्रासर
-बृहस्पतिवार को राजस्व उप निरीक्षक को मौके पर भेजा गया है। गैला पत्थरकोट में राशन की कमी है तो राशन भिजवा देंगे। -सोहन सिंह सैनी नोडल अधिकारी मदकोट /उपजिलाधिकारी बेड़ीनाग