गैरागांव के पास नदी में इस तरह फेंक दिया मलबा
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बलुवाकोट-पय्यापौड़ी सड़क के पुनर्निर्माण कार्य से निकले मलबे को गैरा गांव के पास फेंक कर गधेरे को पाट दिया गया है। मलबे से हैंडपंप को दबा दिया गया है, सिंचाई योजना को भारी नुकसान पहुंचा है। सिंचाई गूल क्षतिग्रस्त होने के कारण छह महीने तक सिंचाई व्यवस्था बाधित रही, लेकिन न तो गधेरे में मलबा डालना बंद हुआ, न पेयजल, सिंचाई योजनाओं की मरम्मत के लिए कोई कदम कार्यदायी संस्था ने उठाया, जिसे लेकर लोगों में गुस्सा है। परिवर्तन संगठन ने धारचूला के एसडीएम के सामने मामला उठाया है।
लोनिवि का विश्वबैंक डिवीजन अस्कोट आपदा पुनर्निर्माण परियोजना के तहत 5.14 करोड़ रुपये की लागत से बलुवाकोट-पय्यापौड़ी मार्ग (9.40 किमी) का पुनर्निर्माण कर रहा है। सड़क पुनर्निर्माण से निकले मलबे को गैरा गांव के पास दो स्थानों पर गधेरे में डाल दिया गया। इससे गधेरा पटने के साथ ही एक हैंडपंप दब गया और सिंचाई की योजना क्षतिग्रस्त हो गई। सिंचाई योजना क्षतिग्रस्त होने से जून 2017 से दिसंबर 2017 तक क्षेत्र में सिंचाई नहीं हो सकी। अब अस्थायी रूप से गूल में पानी चलाया गया है।
परिवर्तन संगठन के रोहित खाती आदि ने धारचूला के एसडीएम राजकुमार पांडे को पत्र देकर कहा कि विश्व बैंक डिवीजन के अधिशासी अभियंता के सामने छह महीने पहले मामला उठाया था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। खाती का कहना है कि नाले में मलबा डालने से बरसात में भूकटाव का भी खतरा है। उन्होंने एसडीएम से गधेरे और हैंडपंप से मलबा हटाने के साथ ही सिंचाई योजना की मरम्मत कराने की मांग की है। एसडीएम ने प्रकरण की जांच कराने का आश्वासन दिया है। वहीं, विश्व बैंक के अस्कोट डिवीजन के अधिशासी अभियंता अरुण पांडेय नाले में मलबा डालने की बात से अनभिज्ञता जताते हुए कहते हैं कि मामले की पड़ताल की जाएगी, जो उचित होगा, वैसे कदम उठाए जाएंगे।