पिथौरागढ़। गंगोलीहाट स्थित बेलपट्टी के बनेला गांव निवासी किसान भगत सिंह (45) जैविक उत्पादों में अभिनव प्रयोग कर रहे हैं। काले गेहूं के बाद अब वह काला चावल के उत्पादन में जुट गए हैं। उनकी योजना इस सीजन में सरयू घाटी और सोमेश्वर क्षेत्र में काला चावल बीज की रोपाई कर उसका उत्पादन करने की है। यदि उनका यह प्रयोग सफलरहा तो पर्वतीय क्षेत्र के किसानों की आर्थिकी में भी इजाफा होगा।
भगत सिंह पिछले कई वर्षों से जैविक उत्पादन से जुड़े हैं। उन्होंने चिटगल गांव में 25 नाली जमीन किराए पर ली है। इसमें उन्होंने पहले काले चावल का उत्पादन किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ से ऑनलाइन गेहूं और चावल का बीज मंगाया। उन्होंने चार किलो चावल के बीज की बुवाई कर रोपा। इसमें करीब 350 किलो चावल का उत्पादन हुआ। इस सीजन में उन्होंने 20 किलो गेहूं बोया लेकिन इसकी पैदावार खास नहीं हुई।
उन्होंने बताया कि कम बारिश के चलते उत्पादन पर असर हुआ। चावल के उत्पादन से वह संतुष्ट हैं। उनका कहना है कि यदि काले चावल की बुवाई घाटी वाले क्षेत्रों में की जाए तो उत्पादन बेहतर होगा। उन्होंने बताया कि इस खरीफ सीजन में वह गंगोलीहाट क्षेत्र के सरयू घाटी और अल्मोड़ा के सोमेश्वर में इसकी नर्सरी तैयार कर काले चावल की खेती करेंगे। इसके लिए उनकी क्षेत्र के किसानों से बात हुई है। अभी वह काला चावल 250 रुपया प्रति किलो की दर से बेच रहे हैं। संवाद
काले चावल में पाए जाने वाले पोषक तत्व और गुण
पिथौरागढ़। काले चावल में एंथ्रोसायनिन एंटीआक्सीडेंट, आयरन, जिंक, विटामिन-ई, मैंगनीज, फाइबर, सिलिनियम, मैग्निशियम, फास्फोरस, फाइटोन्यूट्रिएटस, फाइटो केमिकल पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह कैंसर, हार्ट, मधुमेह, अल्जाइमर, सिकलीन, खून की कमी, तनाव, ब्लड प्रेशर, मोटापा, कब्ज, नए ऊतक का निर्माण करने के काम आता है। संवाद
सहकारिता किसान संघ से जुड़े हैं भगत
पिथौरागढ़। भगत सिंह कालिका देवी स्वायत्त सहकारिता किसान संघ गंगोलीहाट से जुड़े हैं। इस सहकारिता से 18 समूहों की 350 महिला-पुरुष जुड़े हैं। यह समूह जैविक हल्दी, अदरक, सब्जी, धान आदि का उत्पादन करते हैं। साथ ही अचार, जूस, मसाले का विपणन कार्य भी होता है। संवाद
किसान के जैविक उत्पाद और काला गेहूं के उत्पादन के बारे में जानकारी मिली है। जल्द ही किसान से मुलाकात कर उन्हें कृषि कार्य के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। -रितु टम्टा, मुख्य कृषि अधिकारी, पिथौरागढ़।