वीर चक्र विजेता 9 कुमाऊं रेजीमेंट के सेवानिवृत्त नायब सूबेदार गणेश दत्त जोशी का बृहस्पतिवार को अपने आवास पर 77 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 1965 के युद्ध में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने अदम्य वीरता का परिचय दिया था। इसी के एवज में भारत सरकार ने उनको सात सितंबर 1965 को वीर चक्र से नवाजा था। सेना से रिटायर होने के बाद वह अपने गांव मेलडुंगरी आ गए। बाद में वह पिथौरागढ़ नगर में आकर बस गए।
वीर चक्र विजेता गणेश दत्त की तीन बेटियां और एक बेटा है। उनके निधन की सूचना मिलते ही प्रशासन की ओर से एसडीएम एसके पांडे ने पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र चढ़ाए। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष केदार दत्त जोशी, पूर्व सैनिक शमशेर महर, राम सिंह बिष्ट, रिटायर्ड कर्नल रामदत्त जोशी, पूर्व सैनिक कल्याण समिति के अध्यक्ष दान सिंह वल्दिया, मीडिया प्रभारी विनोद बिष्ट, संजय बोहरा, कुंडल मोसाल, चंचल सिंह भंडारी समेत बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पर पहुंचे।
इन लोगों ने कहा कि वीर चक्र विजेता सैनिक के निधन की सूचना के बाद भी सेना के स्थानीय हेडक्वार्टर से कोई अधिकारी और जवान श्रद्धांजलि देने के लिए नहीं पहुंचा। युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष ऋषेंद्र महर ने भी वीर चक्र विजेता के प्रति दिखाए गए उपेक्षापूर्ण रवैये पर हैरानी जताई है। उनका अंतिम संस्कार रामेश्वर घाट पर कर दिया गया। स्व. गणेश दत्त सेना से रिटायर होने के बाद सामाजिक कामों में शामिल रहे। वह सामाजिक मुद्दों के प्रति गहरी रुचि रखते थे। लोगों की मदद के लिए वह हमेशा तैयार रहते थे।
गणेश दत्त की टुकड़ी ने महाराजके पर कब्जा किया था
वीरचक्र विजेता नायब सूबेदार गणेश दत्त जोशी की बटालियन 1965 में धारचूला में तैनात थी। अगस्त 1965 को इस बटालियन को अंबाला के पास लालरू भेजा गया था, लेकिन वहां से इस बटालियन को 69 माउंटेन ब्रिगेड के साथ तीन सितंबर को माधोपुर भेजा गया। इस बटालियन को पहला काम रावी पुल की रक्षा का सौंपा गया। इसके अलावा अन्य बटालियनों के साथ मिलकर महाराजके पर कब्जा करने की जिम्मेदारी भी 9 कुमाऊं को मिल गई। कुमाऊं रेजीमेंट की ओर से प्रकाशित हरी कलगी की वीरगाथा किताब में लिखा गया है कि सात सितंबर 1965 की रात एक बजे से युद्ध शुरू हुआ और तोपों की बमबारी करते हुए 9 कुमाऊं रेजीमेट आगे बढ़ गई। उसी रात इस बटालियन ने महाराजके पर कब्जा कर लिया। दुश्मन के 20 लोग इस युद्ध में मारे गए। बटालियन के दो सैनिक शहीद हुए और तीन जख्मी हुए। महाराजके पर कब्जा करने वाली टुकड़ी का नेतृत्व नायब सूबेदार गणेश दत्त जोशी कर रहे थे। इसी वीरता के लिए नायब सूबेदार गणेश दत्त को वीरचक्र से सम्मानित किया गया। वह अविभाजित उत्तर प्रदेश के पहले वीरचक्र विजेता थे। जिस समय उनको राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने वीरचक्र दिया उस समय उनका रैंक नायक का था। बाद में वह प्रमोशन पाकर नायब सूबेदार तक पहुंचे और इसी रैंक से रिटायर हुए।