पिथौरागढ़। पहाड़ पर सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के न होने से लोगों को आए दिन परेशान होना पड़ रहा है। सड़क नहीं होने से गांधीनगर गांव की एक गर्भवती को पहले तीन किमी पैदल सड़क तक पहुंचाया गया। यहां से उसे 108 एंबुलेंस में अस्पताल ले जाया जा रहा था। इसी दौरान उसे प्रसव पीड़ा इतनी अधिक बढ़ी कि उसने रास्ते में ही बच्चे को जन्म दे दिया।
तीन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और उत्तराखंड आंदोलनकारी के गांव गांधीनगर का कोई भी सुधलेवा नहीं है। बार-बार मांग के बावजूद किसी भी सरकार ने अब तक गांव के लिए सड़क नहीं बनवाई। बुधवार सुबह किरन देवी पत्नी हेमराज को प्रसव पीड़ा हुई तो गांव के युवा उसे डोली पर उबड़-खाबड़ रास्तों से तीन किमी पैदल जोशा तक लाए। यहां से उसे 108 एंबुलेंस से सीएचसी मुनस्यारी ले जाया जा रहा था।
चौना और हरकोट गांव के बीच महिला की पीड़ा और बढ़ गई तथा उसने एंबुलेंस में ही बच्चे को जन्म दे दिया। इसके बाद जच्चा-बच्चा दोनों को सीएचसी मुनस्यारी लाया गया, जहां दोनों स्वस्थ हैं।
पचास से अधिक परिवार रहते हैं गांव में
पिथौरागढ़। गांधीनगर गांव के 50 से अधिक परिवार लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। गांव निवासी नरी राम, भीम सिंह कुंवर, दिलीप सिंह भंडारी ने आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उस समय अंग्रेजों ने नरी राम की संपत्ति को कुर्क कर दिया था। इसी गांव के रंजीत विश्वकर्मा ने भी राज्य आंदोलन के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बावजूद इसके गांव की ओर देखने वाला कोई नहीं है। संवाद
गांधीनगर गांव के 50 से अधिक परिवार सड़क सुविधा से वंचित हैं। सरकार सड़क पहुंचाने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठा रही है। गर्भवती, बीमार और बुजुर्गों को आए दिन डोली पर सड़क तक लाना पड़ता है। सड़क का निर्माण शीघ्र नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा। -हीरा सिंह चिराल, कांग्रेस नेता।
यह मामला मेरे संज्ञान में आया है। गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। ग्रामीणों को दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। -रीना जोशी, डीएम पिथौरागढ़।