अमर उजाला ब्यूरो, पिथौरागढ़। भारत के लिपुलेख तक सड़क निर्माण के बाद से भले ही नेपाल बौखलाया हो लेकिन भारत-नेपाल सीमा पर सबकुछ शांत है। दोनों देशों की सीमाओं पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों के जवान सामान्य दिनों की तरह अपनी-अपनी सीमाओं पर गश्त करते हैं। इस दौरान जब नजदीक आते हैं तो दोनों की आपस में सौहार्दपूर्ण बातें भी होती हैं। भारत और नेपाल का सीमांकन करने वाली काली नदी के अंतर्राष्ट्रीय झूला पुलों पर भले ही सशस्त्र बलों के जवान पहरेदारी करते हों लेकिन रोटी-बेटी के संबंध रखने वाले दोनों देशों के बीच आवाजाही बेरोकटोक ही चलती रही है। भारतीय सीमा पर रहने वाले नेपाल के लोग नमक और आटा-चावल से लेकर अन्य रोजमर्रा के जरूरी सामान के लिए भी भारत के बाजार पर निर्भर हैं। सीमांत क्षेत्र के गांवों में दोनों देशों के बीच सर्वाधिक वैवाहिक संबंध होते हैं। सदियों से चली आ रही रिश्तों की इसी डोर को आज रोटी-बेटी के संबंध का नाम दिया गया है। इतना ही नहीं धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से भी दोनों राष्ट्र एक दूसरे के बेहद करीब हैं। भारत में रहने वाले हजारों परिवारों की आस्था त्रिपुरा सुंदरी से लेकर पशुपतिनाथ में है तो नेपाल का जनमानस तमाम धार्मिक कार्यों के लिए हरिद्वार से लेकर चार धाम तक का रुख करता है। लेकिन भारत के लिपुलेख तक सड़क निर्माण करने के बाद से नेपाल के सुर बदले नजर आ रहे हैं। नेपाल ने इस सड़क को अतिक्रमण करार देकर और नया नक्शा जारी कर राजनीति गर्माने की कोशिश की है। हालांकि सीमा पर नेपाल की इस राजनीतिक गतिविधि का कोई असर नहीं है। कालापानी तक पूरी तरह से शांत है। सीमा पर स्थित बार्डर आउट पोस्टों में दोनों देशों के सुरक्षा बलों के जवान सामान्य दिनों तक तरह अपने-अपने क्षेत्रों में गश्त कर रहे हैं। गश्त के दौरान जब नजदीक आते हैं तो एक-दूसरे से कुशल क्षेम भी पूछते हैं। सीमा पर किसी तरह की कड़वाहट नहीं है। हालांकि नेपाल में जो गतिविधियां हो रही हैं उसके लिए भारतीय सुरक्षा एजेंसियां वहां के मीडिया में आने वाली खबरों पर भी नजर रख रही हैं।
---:: सीमा पर सबकुछ शांत है। हमारी सुरक्षा व्यवस्थाएं चाक चौबंद हैं। सीमा पर निगरानी रखी जा रही है। बार्डर में तैनात जवानों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। नेपाल की सुरक्षा एजेंसीज के साथ अच्छा तालमेल है। वह अपने इलाके में पेट्रोलिंग करते हैं और हम अपने इलाके में पेट्रोलिंग करते हैं। गश्त के दौरान नियमित बातचीत भी होती है। ". -महेंद्र प्रताप,कमांडेंट सशस्त्र सीमा बल।