आम आदमी की पहुंच से दूर हो रहे फल
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शारदीय नवरात्र बृहस्पतिवार से शुरू हो रहे हैं। पहले से ही आम लोगों की पहुंच से बाहर हो रहे फलों के दाम नवरात्र में और ज्यादा बढ़ने की संभावना है। मांग बढ़ते ही कीमतें भी बढ़ने लगती है। जिले में सारे फल मैदान की मंडियों से आते हैं। इस समय पहाड़ की घाटियों में सिर्फ अमरूद पैदा होता है। अमरूद भी खुले बाजार में 40 रुपये किलो बिक रहा है।
फल विक्रेताओं का कहना है कि हालांकि फलों में जीएसटी का कोई असर तो नहीं है, लेकिन मानसून के समय मैदानी इलाकों में बाढ़ आने से फलों के दाम जुलाई से ही उछाल मारने लगे थे। इनमें अब तक गिरावट नहीं आई। अब त्योहारों का सीजन आ रहा है, ऐसे में फलों के दाम बढ़ने लग जाएंगे। व्यापारियों का कहना है कि मैदान की मंडियों से फलों को यहां तक पहुंचाने में भाड़ा भी लगता है। इस कारण कीमतें खुद बढ़ जाती हैं। फल विक्रेता शेखर चंद्र ने बताया कि हर साल नवरात्र से फलों की कीमत बढ़ जाती है और दिवाली तक यह क्रम बना रहता है।
नवरात्र में मंदिरों में चढ़ाने के लिए नारियल की मांग सबसे ज्यादा रहती है। इस समय नारियल का एक दाना 40 रुपये में मिल रहा है, जबकि कुछ दिन पहले तक नारियल का एक दाना 35 रुपये में मिल जाता था। केले की मांग भी त्योहार में अधिक रहती है। इस समय अच्छी श्रेणी का केला 60 रुपये दर्जन हो गया है। सामान्य श्रेणी का केला 50 रुपये दर्जन से कम नहीं है। नवरात्र में मंदिरों में चढ़ाने, फलाहार करने के लिए फलों की मांग बढ़ जाती है। व्यापारी स्वीकार करते हैं कि कीमतें कम से कम 10 फीसदी तक बढ़ेंगी।
फलों की कीमतों में दो माह में आया अंतर
फल पहले अब
सेब 60 70 (रुपये किलो)
केला 50 60 (रुपये दर्जन)
अनार 80 100 (रुपये किलो)
अमरूद 30 40 (रुपये किलो)
नारियल 35 40 (रुपये दाना)