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बस्तड़ी में मलबे से चार और शव निकाले गए

Mon, 04 Jul 2016 10:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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बस्तड़ी में मलबे से चार और शव निकाले गए - फोटो : अमर उजाला
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पिथौरागढ़ और चमोली के कई स्थानों पर बादल फटने से आई आपदा के बाद लापता 21 ग्रामीणों की खोजबीन ने सरकार और तमाम राहत एजेंसियों को मुसीबत में डाल दिया है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और पुलिस समेत कई राहत एजेंसियों द्वारा दिन रात मेहनत के बावजूद लापता ग्रामीणों का कुछ पता नहीं चल पा रहा है।  इस बीच, बस्तड़ी में सोमवार को चार और शव मलबे से निकाले गए। जिले में अब तक कुल 17 शव बरामद हो चुके हैं। इस बीच आपदास्थल से कुछ लोगों के कटे हुए अंग भी बरामद हुए हैं।
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पिथौरागढ़ एसपी रोशन लाल शर्मा ने देर शाम बताया कि सोमवार को मलबे से शेखर भट्ट (38) पुत्र दामोदर भट्ट, रिया (10) पुत्री चंद्रबल्लभ, चंद्रकला भट्ट (26) पत्नी शेखर भट्ट, इंदु (43) पत्नी जगदीश चंद्र के शव मलबे से निकाले गए। आईटीबीपी के सेनानी महेंद्र प्रताप, 8 कुमाऊं रेजीमेंट के कर्नल जे चौधरी ने बताया कि शवों की खोज का काम जारी रखा जाएगा। वहीं, बस्तड़ी में मलबे से सोमवार को कटे हुए अंग भी बरामद हुए। बस्तड़ी से चार किमी दूर चर्मा नदी के पास कटे हुए दो पैर मिले। ये पैर महिलाओं के बताए जा रहे हैं। वहीं, बस्तड़ी से तीन किमी दूर कटा हुआ एक हाथ भी मिला। आशंका है कि बादल फटने के दौरान लोग काफी दूर तक बह गए होंगे और उनके शरीर के अंग कट गए होंगे।

खोजबीन में जुटी एजेंसियों का मानना है कि किसी व्यक्ति के जीवित बचे होने की उम्मीद ना के बराबर है। हालांकि, जिलाधिकारी एचसी सेमवाल ने कहा कि लापता लोगों की खोजबीन अभी कुछ दिन जारी रहेगी। वहीं, मलबे से बदबू आने पर सेना ने सोमवार को करीब 200 मीटर के दायरे में दवा का छिड़काव किया। मंगलवार से अन्य हिस्सों में भी दवा का छिड़काव होगा।
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 लापता ग्रामीणों की खोजबीन में इस्तेमाल किए जा रहे विक्टिम लोकेटिंग डिवाइस (एलडीडी), लाइफ डिटेक्टर - 2, कोलैप्स्ड स्ट्रक्चर सर्च एंड रेस्क्यू डिवाइस, स्प्रेडर समेत तमाम अत्याधुनिक उपकरण लापता ग्रामीणों की खोजबीन में नाकाम साबित हो रहे हैं। राहत एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी मुसीबत तीन सौ मीटर चौड़े और पांच किमी लंबे क्षेत्रफल में फैले लाखों टन मलबे के बीच लापता ग्रामीणों की तलाश करना है। एनडीआरएफ के प्रशिक्षित डॉग भी लापता लोगों को सूंघने और ढूंढ निकालने में विफल साबित हो रहे हैं।
आपदा के 96 घंटे बाद लापता ग्रामीणों की कोई खोजबीन नहीं होने से अब शासन के आला अफसरों और राहत एजेंसियों से जुड़े विशेषज्ञों को उनके मिलने की उम्मीद ना के बराबर रह गई हैं। सरकार लापता ग्रामीणों को मृत घोषित करने पर भी विचार करने लगी है। हालांकि आपदा सचिव शैलेश बगौली का कहना है कि लापता ग्रामीणों की खोजबीन में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। वहीं मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आला अफसरों के साथ बैठक कर राहत कार्यों की जानकारी ली है। उल्लेखनीय है कि बीते बृहस्पतिवार-शुक्रवार की रात में आई आपदा के बाद पिथौरागढ़ और चमोली में 15 ग्रामीणों की मौत हो गई थी, जबकि 21 लोग लापता हो गए थे।

चार दिन बाद मलबे से जिंदा निकले चार जानवर
बस्तड़ी में सोमवार को जब एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और 8 असम रेजीमेंट के जवान रेस्क्यू अभियान चला रहे थे तब उनको मलबे से एक बकरी के मिमियाने की आवाज आई। 30 जून की रात से मलबे में दबी बकरी की आवाज सुनकर सुरक्षा बलों के जवानों ने मलबा हटाया तो मलबे से तीन बकरियां और एक बछड़ा जिंदा निकले। यहां मलबा हटाने में तीन घंटे लगे। चारों का पशु चिकित्सक डॉ. तरुण ने इलाज किया। ताज्जुब की बात यह है कि इन जानवरों को कोई चोट तक नहीं आई है। सुरक्षाबल के जवानों को उम्मीद है कि मलबे से हो सकता है कोई व्यक्ति जिंदा मिल जाए। इधर, यूथ फाउंडेशन ने इन जानवरों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। रविवार को सात और सोमवार को छह जानवर जीआईसी के खुले मैदान में पहुंचा दिए गए।

मुख्यमंत्री अब आज आएंगे बस्तड़ी
 मुख्यमंत्री हरीश रावत का सोमवार को बस्तड़ी दौरा खराब मौसम के कारण स्थगित हो गया। वह अब मंगलवार सुबह 11.30 बजे बस्तड़ी के आपदा प्रभावित इलाके का दौरा करेंगे। पहले सूचना मिली थी कि सीएम सोमवार दोपहर एक बजे आएंगे। फिर सूचना मिली कि मौसम ठीक होने पर वह चार बजे आ सकते हैं। पांच बजे सीएम का कार्यक्रम रद्द हो गया। जिला प्रशासन को अब सीएम के मंगलवार के दौरे का कार्यक्रम मिल गया है।
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