नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) के वरिष्ठ नेता माधव कुमार नेपाल ने एक बार फिर कालापानी विवाद को हवा देने की कोशिश की है। पश्चिमी नेपाल के दार्चुला जिला मुख्यालय में रविवार को कर्मचारियों, जिला परिषद के सदस्यों और पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करते हुए माधव कुमार नेपाल ने कहा कि महाकाली नदी का उद्गम कालापानी नहीं है। वह महाकाली की सहायक नदी कुटी यांग्ती को मुख्य महाकाली मानते हैं। कुटी यांग्ती का उद्गम लिमफ्या धूरा से होता है। वह कहते हैं गुंजी तक दोनों देशों की सीमा का निर्धारण करने के लिए कुटी यांग्ती नदी को ही आधार माना जाना चाहिए।
लिमफ्या धूरा की दूरी कालापानी से 36 किलोमीटर है। नेपाल के कम्युनिस्ट गुंजी, नाभीढांग और कुटी तक के इलाके पर अपना हक जताते हैं। श्री माधव कुमार ने कहा कि 1994 में जब उनकी सरकार थी तब तत्कालीन मंत्री प्रेम सिंह धामी ने कहा था कि मूल महाकाली कुटी यांग्ती है और इसे ही दोनों देशों की सीमा का निर्धारण करने वाली नदी बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2013 की आपदा के समय महाकाली के कटाव के कारण भारत का कुछ हिस्सा नेपाल की तरफ और नेपाल का कुछ हिस्सा भारत की ओर चला गया है। अब सीमा का निर्धारण नए सिरे से किया जाना चाहिए। इसमें अंतरराष्ट्रीय मानकों को आधार माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत एक आत्मनिर्भर देश होने के बावजूद परिपक्व विदेश नीति का परिचय नहीं देता। नाकाबंदी के समय भारत की यही अपरिपक्वता सामने आई थी।
कार्यकर्ताओं की बैठक में उन्होंने भारत की नीतियों की आलोचना की। कहा कि नेपाल एक छोटा देश है और भारत इसके हितों की अनदेखी कर रहा है। महाकाली में बनने वाली हर परियोजना पर नेपाल आधा हिस्सा जरूर लेगा। चाहे वह पंचेश्वर बांध परियोजना हो या फिर अन्य परियोजना। पूर्व प्रधानमंत्री पश्चिमी नेपाल के सीमांत पर्वतीय इलाके के दौरे पर हैं। आज वह गोखले होते हुए डडेलधुरा को रवाना हो गए। उनके साथ पूर्व मंत्री सुरेंद्र पांडे, पार्टी के स्थानीय संयोजक रामदत्त जोशी और गणेश ठगुन्ना भी हैं।