पिथौरागढ़। फायर सीजन नजदीक आते ही वन विभाग ने जंगलों को आग से बचाने की तैयारी शुरू कर ली है। इस बार के फायर सीजन में वनाग्नि से निपटने के लिए अग्निशमन, आपदा प्रबंधन, पुलिस, एनडीआरएफ सहित 20 विभागों का सहयोग लिया जाएगा। पुलिस और राजस्व विभाग के सहयोग से जंगलों में आग लगाने वाले अराजक तत्वों की पहचान के साथ इनके खिलाफ कार्रवाई भी होगी।
पिथौरागढ़ जिले में आरक्षित, वन पंचायत और सिविल वनों का कुल क्षेत्रफल 3,94,506 वर्ग हेक्टेयर है। 15 फरवरी से 15 जून तक चार महीने चलने वाले वाले सीजन में पिथौरागढ़ के इन वन क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं आम हो जाती हैं। कई बार तो वनाग्नि इतनी भयावह हो जाती है कि हजारों हेक्टेयर वन क्षेत्र तबाह हो जाता है। इस साल जनवरी और फरवरी में ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं।
ऐसे में वन विभाग फायर सीजन के लिए अलर्ट मोड पर आ गया है। फायर लाइन को व्यवस्थित किया जा रहा है। फायर वॉचर बढ़ाए गए है और नए फायर स्टेशन भी स्थापित किए गए हैं। बिना जन जागरूकता के जंगलों को बचाना आसान नहीं होता। ऐसे में वन विभाग सभी रेंजों में जागरूकता अभियान चला रहा है। 13 फरवरी को वन विभाग मॉक ड्रिल कर आग से निपटने के लिए पूर्वाभ्यास करेगा। यह पहली बार होगा कि वन विभाग के साथ ही 20 अन्य विभाग वनाग्नि को रोकने के लिए अपनी ताकत दिखाएंगे।
आग लगाने वालों की होगी पहचान
जंगलों में लगने वाली आग की 90 फीसदी घटनाएं मानव जनित होती हैं। कभी-कभी अच्छी घास होने का लालच तो कभी जानवरों के शिकार के लिए जंगलों को आग के हवाले किया जाता है। इस बार वन विभाग ऐसे लोगों की पहचान कर इनके खिलाफ सख्त कदम उठाने का मन बना चुका है। इसके लिए पुलिस और राजस्व विभाग का सहयोग लिया जाएगा।
ये विभाग भी देंगे वनाग्नि रोकने में सहयोग
अग्निशमन, पुलिस, राजस्व, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आपदा प्रबंधन, नगर निगम, एसएसबी, आईटीबीपी सहित 20 विभाग वनाग्नि को रोकने में अपना सहयोग देंगे।
जंगल बचाने के लिए बढ़ाए गए क्रू स्टेशन और फायर वॉचर
वर्ष 2025 में वन विभाग ने जिले भर में वनाग्नि की रोकथाम के लिए 225 फायर वॉचरों की तैनाती के साथ 68 क्रू स्टेशन स्थापित किए थे। इस बार फायर सीजन के लिए चार क्रू स्टेशन और 25 फायर वॉचर की संख्या बढ़ाई गई है।
वर्ष 2026 की शुरुआत में ही जलने लगे जंगल
जिले में इस साल जनवरी और फरवरी में ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं सामने आने से वन विभाग की चिंता बढ़ गई है। बीते 22 जनवरी को देवत, नैनीसैनी के जंगलों में आग लग गई। आग पर बमुश्किल काबू पाया गया । 27 जनवरी को डीडीहाट के खाबरचूला जबकि नौ फरवरी को बंगापानी तहसील के धामी गांव, मदरमा और आलमगांव में वनाग्नि की घटनाएं सामने आई हैं। शीतकाल में ही जंगलों में आग लगने से फायर सीजन में वन विभाग के लिए जंगल बचाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
कोट
फायर सीजन में जंगलों की सुरक्षा के लिए वन विभाग तैयार है। इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। इस बार अन्य विभागों का सहयोग भी लिया जाएगा। क्रू सेंटर और फायर वॉचरों की संख्या भी बढ़ाई गई है। - आशुतोष सिंह, डीएफओ, पिथौरागढ़