झूलाघाट एवं आसपास के नौनिहालों को प्राइमरी शिक्षा देने वाले स्कूल बदहाल है। विद्यालय की छत के जर्जर हाल होने से अधिकतर कमरे बारिश में टपकते हैं। इससे शिक्षण कार्य बाधित होता है।
क्षेत्र के एकमात्र प्राइमरी स्कूल की स्थापना वर्ष 1942 में हुई थी। यह स्कूल आज बदहाल पड़ा है। दुर्गम क्षेत्र के स्कूल में पिछले वर्ष तक 39 बच्चे शिक्षा ले रहे थे। विद्यालय के शिक्षकों की मेहनत से इस वर्ष छात्रसंख्या बढ़कर 42 हो गई है, लेकिन विद्यालय भवन के जर्जर हाल होने से बच्चों को खतरा बना है। विद्यालय की छत की लकड़ी सड़ चुकी है। भवन में रंगरोगन नहीं होने से दीवारें काली पड़ चुकी हैं। स्कूल के कमरों में टूटा फर्नीचर भरा है। स्कूल में खेल मैदान भी नहीं है।
पिछले वर्ष तक बच्चों की किताबें और ड्रेस का पैसा स्कूल के खाते में आता था। इस वर्ष बच्चों के बैंक खाते खुलने के बावजूद धनराशि नहीं आई है। स्कूल में विधायक निधि और एसएसबी द्वारा दिया गया कंप्यूटर तो है, लेकिन कंप्यूटर शिक्षक नहीं है। कुछ वर्ष पहले तक इस स्कूल में नेपाल के छात्र भी शिक्षा लेते थे। उस समय छात्र संख्या 80 के आसपास थी। हाल के वर्षों में सरकारी स्कूलों में सुविधाओं का अभाव, निजी स्कूलों द्वारा अंग्रेजी शिक्षा देने से प्रत्येक वर्ष संख्या घटती जा रही है।
प्राइमरी स्कूल झूलाघाट की हालत की जानकारी ली जा रही है। विद्यालय के सुधार के लिए प्रयास किए जाएंगे।
-शौकत अली, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, पिथौरागढ़।