पिथौरागढ़ के लंदन फोर्ट में प्रस्तुति देते कलाकार।
- फोटो : पिथौरागढ़
पिथौरागढ़ के किले में लोक कलाओं पर आधारित दो दिवसीय भरत लोक रंगोत्सव कार्यशाला का लोक गायन, वादन के साथ समापन हो गया है। कार्यशाला का आयोजन संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली के सहयोग से भाव राग ताल अकादमी पिथौरागढ़ ने किया।
दिल्ली से आईं वरिष्ठ रंगकर्मी लक्ष्मी रावत ने लोक संगीत के संरक्षण के लिए सतत प्रयासों की जरूरत बताते हुए कहा कि लोक कला की जानकारी नई पीढ़ी को देनी होगी। समापन दिवस पर लोक कलाकारों ने ढोल, नगाड़ा वादन के साथ ही विभिन्न लोक वाद्यों की प्रस्तुति दी गई। विशुद्ध लोक संगीत और लोक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति दी गई।
गढ़वाल के लोक नृत्य रम्माण और सोरघाटी (पिथौरागढ़) के मुखौटा नृत्य हिलजात्रा की प्रस्तुति दी गई।
पिथौरागढ़ की शिवानी विश्वकर्मा ने लोक कला पर आधारित चित्रकला प्रदर्शनी लगाई। पौड़ी से आईं वशुंधरा नेगी ने लोक नाट्य तो द्वाराहाट से आए डॉ. दीपक मेहता ने लोक संगीत की महत्ता पर प्रकाश डाला।
लोगों ने कार्यशाला को लोक कला के संरक्षण में मील का पत्थर बताया। कार्यशाला में भाव राग ताल एकेडमी के कैलाश कुमार, रोहित यादव, धीरज कुमार, दीपक मंडल, रतन सिंह असवाल समेत तमाम लोग मौजूद थे।