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Pithoragarh News: ततैयों के हमले में मां-बेटी सहित पांच महिलाएंं घायल

Mon, 05 Oct 2026 11:15 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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पिथौरागढ़। सीमांत जिले में खेत-जंगलों में काम करने वाले ग्रामीणों पर ततैयों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं लेकिन इनसे निपटने के लिए वन विभाग की तैयारी सवालों के घेरे में है। सोमवार को मूनाकोट ब्लॉक के बिलाई गांव में ततैयों के झुंड ने मां-बेटी समेत पांच महिलाओं को घायल कर दिया। इनमें तीन को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लगातार घटनाओं से पूरे क्षेत्र में चिंता व भय का माहौल है।
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बिलाई निवासी नेहा (22) सोमवार सुबह खेत में घास काट रही थी। इसी दौरान ततैयों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। बेटी को बचाने पहुंची उसकी चाची भावना (35) भी हमले की चपेट में आ गईं। जंगल में घास काट रही नेहा की मां संतोषी देवी (46) पर भी ततैयों ने हमला कर दिया। परिजन तीनों को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सक डॉ. वर्षा के अनुसार तीनों महिलाओं के शरीर पर ततैयों के कई डंक लगे हैं और उन्हें भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है।

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बिण में भी महिला पर हमला

बिण निवासी 53 वर्षीय गोदावरी देवी पर रविवार शाम घर के आंगन में काम करते समय ततैयों ने हमला कर दिया। परिजन उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। ईएमओ डॉ. वर्षा के अनुसार चिकित्सकों की देखरेख में उनका उपचार चल रहा है।
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झाड़-फूंक के चक्कर में जोखिम में जान
बिलाई गांव की ही सरस्वती देवी (45) भी सोमवार को ततैयों के हमले में घायल हो गईं। शरीर पर कई डंक लगने के बाद भी उन्होंने जिला अस्पताल जाने के बजाय घर पर झाड़-फूंक से उपचार कराने का फैसला किया। परिजनों और ग्रामीणों के मुताबिक उन्हें अस्पताल में चिकित्सकीय उपचार कराने की सलाह दी गई लेकिन वह नहीं माहीं। ततैयों के डंक के बाद किसी तरह की गंभीर एलर्जी या विषाक्त प्रतिक्रिया होने पर स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। ऐसे में अस्पताल पहुंचने में देरी जोखिम बढ़ा सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में अब भी ततैयों के हमले जैसे मामलों में तत्काल चिकित्सकीय उपचार के बजाय झाड़-फूंक पर भरोसा किया जाता है। ऐसे मामलों में समय पर अस्पताल पहुंचना जरूरी है ताकि चिकित्सक मरीज की स्थिति की निगरानी कर सकें और जरूरत पड़ने पर तत्काल उपचार दिया जा सके।

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13 दिन पहले बुजुर्ग की गई थी जान

बिण ब्लॉक के निशनी गांव में 13 दिन पहले ततैयों के हमले में 75 वर्षीय होशियार सिंह की मौत हो गई थी। इसके बाद बीते बृहस्पतिवार को उनकी पत्नी और दो साल के पोते पर भी ततैयों ने हमला कर दिया। दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। जिला अस्पताल में तीन दिन उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ।


ततैयों के छत्तों को सुरक्षित तरीके से हटाने का हमेशा प्रयास रहता है। जहां से भी इसकी सूचना मिलती है वहां टीम भेजी जाती है। आम तौर पर ततैये ऊंचे पेड़ों पर छत्ता लगाते हैं। ऐसे में कर्मियों को अपनी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए छत्ते हटाने पड़ते हैं जो काफी चुनौतीपूर्ण काम है।
-दिनेश जोशी, रेंजर, पिथौरागढ़

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न तो उपकरण, ना प्रशिक्षण... वन विभाग की भूमिका पर सवाल

पिथौरागढ़। ततैयों के हमले पिथौरागढ़ में हर साल लोगों की जान ले रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बीते पांच वर्षों में 25 से अधिक लोगों की ततैयों के हमले में मौत हो चुकी है। इसके बावजूद वन विभाग के पास ततैयों के छत्ते सुरक्षित तरीके से हटाने के लिए पर्याप्त उपकरण और प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं हैं। जिले में अब तक किसी कर्मचारी को ततैयों के छत्ते हटाने का विशेष प्रशिक्षण नहीं दिया गया है।
स्थिति यह है कि जब कहीं छत्ते की सूचना मिलती है तो वनकर्मियों को उपलब्ध संसाधनों के साथ ही मौके पर जाना पड़ता है। कई बार ऊंचे पेड़ों पर बने छत्तों को हटाना उनकी अपनी जान के लिए भी जोखिम भरा होता है। ऐसे में सवाल यह है कि जब जिले में ततैयों के हमले से हर साल ग्रामीणों की जान जा रही है तो विभाग ने इससे निपटने के लिए अब तक स्थायी और सुरक्षित व्यवस्था क्यों नहीं तैयार की।

हमलों की घटनाएं बढ़ने के बावजूद न प्रशिक्षित टीम, न पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और न ही ग्रामीणों के लिए व्यापक जागरूकता एवं त्वरित सहायता की व्यवस्था नजर आना चिंता बढ़ाता है। विभाग की कार्रवाई फिलहाल सूचना मिलने के बाद मौके पर टीम भेजने तक सीमित दिखाई देती है।
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