झूलाघाट/पिथौरागढ़। बारिश से झूलाघाट में जमीन दरकने से काली नदी किनारे के मकानों को खतरा पैदा हो गया है। हादसे की आशंका को देखते हुए दुकानदारों ने दुकानें खाली कर दी हैं। उधर मूसलाधार बारिश से ओगला पसमा हंसेश्वर को जाने वाली सड़क का पुल ध्वस्त हो गया है। इसके चलते लोगों को 20 किमी घूमकर जाना पड़ रहा है।
शनिवार की बारिश से काली नदी किनारे झूलाघाट बाजार की पांच दुकानों की नींव की दीवार धंस गई और दुकानें हवा में लटक गईं। रविवार को सभी पांच दुकानदारों ने खतरे को देखते हुए दुकानों का सामान खाली कर दिया है। वर्ष 2013 की आपदा में काली नदी के तेज बहाव से झूलाघाट बाजार के 24 से अधिक दुकानें और मकान काली नदी में बह गए थे। हवा में लटके कुछ मकानों को जिला प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से गिरा दिया था।
उसी आपदा में इन सभी पांच दुकानों की नींव भी ढह गई थी जिसके बाद सिंचाई विभाग ने काली नदी किनारे तटबंध बनाया था। उसी सुरक्षा दीवार के ऊपर स्वयं भवन स्वामी ने अपने खर्चे पर मकानों की बुनियाद वाली दीवार बनाई थी। शनिवार की रात नींव की दीवार के धंसने से भवन स्वामी बाल कृष्ण भट्ट की दो दुकान और सुरेश चंद्र भट्ट की तीन दुकानों को खतरा पैदा हो गया। इन दुकानों से लगी कैलाश चंद्र भट्ट और डम्बर सिंह बिष्ट की दुकानों को भी खतरा पैदा हो गया है।
दुकानें चलाने वाले धर्मानंद नरियाल, सुरेश चंद्र भट्ट, जावेद अख्तर, विपिन चंद्र जोशी और चक्र बहादुर कुंवर ने जिला प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। क्षेत्र के राजस्व निरीक्षक नवीन चंद्र पाण्डेय ने बताया कि झूलाघाट में दुकानों के नींव ढह जाने की सूचना प्राप्त हुई है। जांच कर जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को दी जाएगी।
उधर ओगला-भागीचाैरा-पसमा-हंसेश्वर मोटर मार्ग में डाेकुना के समीप स्थित पुल 15 सितंबर की रात हुई बारिश से ध्वस्त हो गया है। इसके चलते लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र के लोग हंसेश्वर स्थित काली नदी के घाट पर दाह संस्कार करते हैं।
अब लोगों को शव दाह के लिए ओगला-अस्कोट होते हुए 20 किमी से अधिक घूमकर जाना पड़ रहा है। अधिकांश लोग पैदल आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं। सामाजिक कार्यकर्ता होशियार सिंह, लक्ष्य धामी, नेहा धामी, विमला देवी आदि लोगों ने प्रशासन से शीघ्र पुल का निर्माण करने की मांग की है।
चंपावत की दो ग्रामीण सड़कें अब भी बंद
चंपावत। रविवार सुबह बूंदाबांदी के बाद दिनभर मौसम सुहाना रहा। वहीं जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की दो सिमलखेत-सिब्योली और बांकू-सुल्ला-पासम सड़क अब भी बंद हैं। आपदा प्रबंधन विभाग का कहना है कि सड़कें एक-दो दिन में खोल दी जाएंगी। संवाद