मुवानी में बंद पड़ा पशु अस्पताल
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करीब 25 गांवों के केंद्र स्थल मुवानी में खोले गए पशु अस्पताल में पांच माह से ताला लगा है। अस्पताल में अब कोई कर्मचारी नहीं है। जनवरी में इस अस्पताल में तैनात पशुधन प्रसार अधिकारी का स्थानांतरण हो गया था तब से विभाग ने किसी भी कर्मचारी की तैनाती नहीं की। क्षेत्र के पशुपालक कई बार उच्चाधिकारियों के सामने इस समस्या को उठा चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं हो पाया है।
अस्पताल बंद होने से जानवरों के लिए दवा नहीं मिल पाती। कृत्रिम गर्भाधान पूरी तरह ठप है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. जीएस धामी ने दो माह पहले क्षेत्र के लोगों को आश्वासन दिया था कि किसी नजदीकी अस्पताल से पशुधन प्रसार अधिकारी को सप्ताह में तीन दिन मुवानी अस्पताल में भेजने की व्यवस्था करेंगे, लेकिन वह इसे अब तक लागू नहीं कर पाए।
मुवानी घाटी विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष रमेश बम ने कहा कि एक तरफ सरकार पशुपालन को बढ़ावा देने, दूध का उत्पादन बढ़ाने की बात करती है, दूसरी तरफ मुख्य स्थानों पर ही पशु अस्पताल बंद पड़े हैं। उन्होंने कहा कि 25 गांवों के पशुपालक रोज अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन वहां पर कोई कर्मचारी न होने और ताला लगा होने से निराश लौटना पड़ता है। उन्होंने कहा कि मुवानी में अस्थायी व्यवस्था से अस्पताल का संचालन न किया जाए। यहां पर स्थायी रूप से स्टाफ की तैनाती की जाए। उन्होंने कहा कि एक बार फिर से इस मुद्दे को जिलाधिकारी के सामने रखेंगे। यदि समाधान नहीं हुआ तो देहरादून जाकर पशुपालन मंत्री से मिलेंगे।