खुशियों की सवारी नहीं मिलने से थल अस्पताल में इंतजार करते ग्रामीण
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एक माह से थल क्षेत्र की 108 सेवा और खुशियों की सवारी ईंधन नहीं होने से गौचर अस्पताल के परिसर में खड़ी हैं। देहरादून फोन करने पर कर्मचारी गाड़ी खराब होने की बात कह रहे हैं। इससे लोगों को निजी वाहनों से अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है।
जिले में नौ 108 और नौ खुशियों की सवारी हैं। फंड नहीं मिलने से सभी वाहन कई दिनों से खड़े हैं। इससे मरीजों को आपातकाल में निजी वाहनों से अस्पताल जाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं इनमें कार्यरत 55 कर्मचारियों को तीन माह से वेतन नहीं मिला है। इस अव्यवस्था से गरीब लोग परेशान हैं। 15 अगस्त को मदीगांव (कोट्गाड़ी) के हरीश चंद्र पाठक ने अपनी बहू योगिता पाठक (23) को दर्द उठने पर सुबह 11 बजे 108 को फोन किया। फोन पर उन्हें 108 सेवा के खराब होने की जानकारी दी गई।
बड़ी मुश्किल हालत में एक निजी गाड़ी को 1500 रुपये में बुक कर वे महिला चिकित्सालय गौचर पहुंचे। स्टाफ नर्स की देखरेख में प्रसूता ने रात आठ बजे एक बच्चे को जन्म दिया। बृहस्पतिवार सुबह घर जाने के लिए योगिता पाठक को पांच घंटे अस्पताल में ही गुजारने पड़े। खुशियों की सवारी आई ही नहीं तब उसके ससुर 1500 रुपये में निजी गाड़ी बुक कर अपने घर गए। चोपड़ा गांव की ममता चंद (20) को भी बृहस्पतिवार सुबह दर्द उठा था, उसे भी 108 सेवा का लाभ नहीं मिला सका। उसे भी उसकी जेठानी माया चंद निजी गाड़ी से अस्पताल लाए थे।
पिथौरागढ़, मूनाकोट, कनालीछीना और धारचूला में वाहनों में ईंधन की व्यवस्था हो गई है। इन विकासखंडों में सेवाएं दी जा रही हैं। थल, मुनस्यारी और डीडीहाट में ईंधन नहीं मिलने से वाहन खड़े हैं। फंड रिलीज हो चुका है। कर्मचारियों के वेतन का मैसेज आ गया है। शुक्रवार तक ईंधन की व्यवस्था हो जाएगी।
-प्रमोद भट्ट, जिला कोआर्डिनेटर।