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महिला अस्पताल में 13 साल से डॉक्टर नहीं

Fri, 17 Feb 2017 10:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
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डाक्टरविहीन थल का महिला अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
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चुनाव का शोरगुल समाप्त हो गया है और यह जानकर आश्चर्य होगा कि यहां के राजकीय महिला अस्पताल में 13 साल से डॉक्टर नहीं है, लेकिन किसी को भी यह अव्यवस्था नजर नहीं आई। एक एएनएम और तीन संविदा नर्स के सहारे संचालित हो रहे इस अस्पताल में आने वालों को जिला अस्पताल ही जाना पड़ता है।
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वर्ष 2003 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़ ने महिला उत्थान योजना के तहत बने महिला अस्पताल भवन का लोकार्पण किया। तब उन्होंने कहा था कि यह अस्पताल 400 गांवों के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा देगा। लोकार्पण के दिन अस्पताल में एक महिला डॉक्टर की तैनाती की गई। ठीक एक साल बाद इस महिला डॉक्टर ने अपना ट्रांसफर अल्मोड़ा करा लिया, लेकिन तब से इस अस्पताल में किसी भी डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई है। आठ साल से अस्पताल में फार्मेसिस्ट भी नहीं है। इस अस्पताल में मुनस्यारी, बेड़ीनाग, डीडीहाट तहसील के 400 गांवों से महिलाएं प्रसव के लिए आती हैं।

साधारण केस को तो नर्स हल कर लेती हैं, लेकिन यदि केस थोड़ा भी जटिल हुआ तो उसे सीधे जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी जाती है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, खून की जांच जैसी कोई सुविधा नहीं है। दवाओं का भी यहां पर अभाव बना है। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय वोट मांगने वाले किसी भी दावेदार या पार्टी के नेता ने अस्पताल की अव्यवस्था पर जुबान नहीं खोली। 
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स्वास्थ्य सेवा पर ध्यान दे सरकार
थल के सामाजिक कार्यकर्ता महिमन सिंह भैंसोड़ा का कहना है कि सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार प्राथमिकता में रखना चाहिए। यह बड़े दुख की बात है कि अस्पताल में 13 साल से डॉक्टर नहीं है और कोई जनप्रतिनिधि आवाज नहीं उठाता। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य सेवा पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। 

यह महिलाओं की उपेक्षा का प्रमाण
ग्राम प्रधान नीमा देवी का कहना है कि महिला उत्थान योजना के तहत अस्पताल खोलने का अर्थ समझ में नहीं आता। महिलाओं की उपेक्षा का इससे बड़ा प्रमाण और क्या हो सकता है कि अस्पताल में वर्षों से डॉक्टर ही नहीं है। उन्होंने कहा कि अब अस्पताल के मुद्दे पर आंदोलन किया जाएगा। तभी कुछ समाधान होगा। 
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