थल में बंद पड़ी हाइड्रम सिंचाई परियोजना
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ग्रामीणों की मांग पर वर्ष 2005 में लकड़ीगाड़ से गोल गांव के लिए आठ लाख रुपए की लागत से बनाई गई हाइड्रम सिंचाई योजना बदहाल है। योजना से छह हेक्टेयर खेतों को सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया, लेकिन बनने के तीन माह बाद ही यह योजना ठप हो गई और किसानों के खेतों में पानी नहीं पहुंचा। उसके बाद पूरे दस साल तक विभाग ने योजना की मरम्मत की जरूरत नहीं समझी। वर्ष 2015 में एक बार फिर योजना की मरम्मत कर चालू तो किया गया, लेकिन जून 2016 में आई आपदा में योजना का मुख्य टैंक क्षतिग्रस्त हो गया और पाइप बह गए। तब से यह योजना पूरी तरह ठप पड़ी हुई है।
इस बार किसानों को धान की रोपाई के लिए पानी नहीं मिल पाया और सिंचाई की सुविधा न मिलने से गेहूं की बुआई में भी देरी हो गई। किसानों का कहना है कि गेहूं के लिए समय-समय पर पानी की जरूरत होती है, लेकिन सिंचाई योजना ठप होने से अब दूसरा रास्ता नहीं है। लघु सिंचाई योजना के तकनीशियन प्रमोद कुमार ने बताया कि जून की आपदा से हुए नुकसान की मरम्मत के लिए आपदा मद से धन की मांग की गई, लेकिन सरकार से धन नहीं मिला। अब प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से धन प्राप्त करने के लिए पांच लाख रुपए का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है, यदि धनराशि मिलेगी तो मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाएगा, लेकिन उन्होंने इसके लिए कोई समयसीमा तय नहीं की।
योजना क्यों बनाई समझ से परे
गोल गांव निवासी धाना देवी का कहना है कि सरकार ने किस कारण यह योजना बनाई, समझ में नहीं आता है। अब तक योजना का कोई लाभ किसानों को नहीं मिला है। फसलों का उत्पादन लगातार कम हो रहा है। सब्जी उगाकर लोग आजीविका चलाते थे, लेकिन पानी के अभाव में सब्जी उत्पादन भी कम होने लगा है।
योजना की जांच होनी चाहिए
गोल निवासी कल्पना देवी का कहना है कि सरकार को कृषि को बढ़ावा देने वाली बात बंद कर देनी चाहिए। जब तक किसानों को सुविधा नहीं मिलेगी, कृषि को बढ़ावा देने की बात बेमानी हो जाएगी। वह कहती हैं कि ऐसे मामलों की जांच होनी चाहिए और योजना ठप होने के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।