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वित्त मंत्री को काले झंडे दिखाने जा रहे किसान गिरफ्तार

Thu, 29 Mar 2018 10:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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पिथौरागढ़ में किसानों को ले जाती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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देव सिंह मैदान में किसान मेले का उद्घाटन कर रहे वित्त मंत्री को काले झंडे दिखाने जा रहे किसानों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले पुलिस एवं किसानों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्कामुक्की हुई। पुलिस किसानों को जबरन बस में भरकर पुलिस लाइन ले गई। हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया। इस मामले में 24 किसानों के खिलाफ शांतिभंग का मामला दर्ज कर लिया है।

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बृहस्पतिवार को वित्त मंत्री प्रकाश पंत एक दिनी दौरे के बीच नगर में किसान मेले का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इससे पहले किसान संगठन के बैनर तले किसानों ने प्रशासन को कार्यक्रम के बहिष्कार के साथ ही मंत्री को काले झंडे दिखाने की चेतावनी दी थी। बता दें कि मुख्यालय में किसान काफी समय से कर्ज माफी और उत्पीड़न रोकने के लिए आंदोलित हैं। वित्तीय वर्ष के आखिरी में कर्ज वसूली को लेकर किसानों को गिरफ्तार किया जा रहा है। इसे लेकर किसान विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। काले झंडे दिखाने की योजना के तहत किसान रामलीला मैदान एकत्र हुए। उन्होंने यहां प्रदर्शन के साथ जुलूस की शक्ल में देव सिंह मैदान की ओर कूच किया। किसान सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चल रहे थे।

किसान जैसे ही सिमलगैर पहुंचे, पुलिस ने उन्हें रोक दिया। रोकने पर किसान भड़क गए और जबरन आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे। इसे लेकर किसानों एवं पुलिस के बीच नोकझोंक और धक्कामुक्की हुई, लेकिन पुलिस ने बल प्रयोग कर सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद उन्हें बस में भरकर पुलिस लाइन लाया गया। मंत्री का कार्यक्रम निपटने तक उन्हें हिरासत में रखा गया। एसएसआई हेम चंद्र पंत ने बताया कि इस मामले में 24 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ शांतिभंग का मामला दर्ज किया है। दोपहर तीन बजे जमानत पर सभी को रिहा कर दिया गया। प्रदर्शन और गिरफ्तार होने वाले किसानों में सुभाष चंद्र जोशी, प्रेम कुमार, शंकर कोहली, गोविंद राम, मोहन राम आदि थे।
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किसानों की आवाज को कुचलने की कोशिश कर रही सरकार
किसान संगठन के जिलाध्यक्ष सुभाष ने कहा कि मामूली सा कर्ज न चुकाने वाले किसानों को जेलों में ठूंसा जा रहा है। गरीब किसानों का कर्ज माफ करने के लिए सरकार के पास रुपये नहीं हैं। वही, विधायकों के वेतन-भत्तों में दिल खोलकर इजाफा किया गया है। सरकार अपनी विफलता छुपाने के लिए किसानों की आवाज को कुचलने की कोशिश कर रही है।

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