पिथौरागढ़। जिला अस्पताल से कोविड-19 के उपचार के लिए भर्ती एक विचाराधीन बंदी फरार हो गया और उसकी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। हालांकि, पुलिस ने करीब साढ़े 12 घंटे बाद उसे गिरफ्तार कर लिया। बंदी के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी बंदी वायुसेना में तैनात था और वहां से भी भगोड़ा घोषित था। उसके खिलाफ गंगोलीहाट थाने हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज है।
कोरोना संक्रमित होने के कारण जिला जेल में बंद विचाराधीन बंदी गौरव उप्रेती को 22 अक्तूबर को जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार रात करीब डेढ़ बजे गौरव अस्पताल में बने बाथरूम की खिड़की तोड़कर वहां से करीब 20 फीट ऊंची दीवार फांदकर फरार हो गया। इसकी जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। कोतवाल रमेश तनवार के नेतृत्व में पुलिस ने कई जगह दबिश दी और शनिवार को दिन में करीब साढ़े 12 बजे उसे जगदंबा कॉलोनी के पास से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी बंदी के खिलाफ जानबूझकर कोरोना फैलाकर लोगों की जान पर जोखिम डालने के आरोप में धारा 51बी आपदा प्रबंधन अधिनियम और भारतीय दंड सहिता 270 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार 10 अक्तूबर को लाली गांव निवासी विचाराधीन कैदी गौरव उप्रेती अपने पड़ोसी उमेश चंद्र उप्रेती पर जानलेवा हमला कर फरार हो गया था। उमेश ने गौरव के खिलाफ गंगोलीहाट थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। गंगोलीहाट के एसओ प्रकाश पांडे ने बताया कि आरोपी को 10 अक्तूबर को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद उसे जिला कारागार भेजा गया था।
अस्पताल में तीन पुलिसकर्मी तैनात थे विचाराधीन कैदी की सुरक्षा के लिए
पिथौरागढ़। विचाराधीन कैदी में कोरोना के लक्षण मिलने के बाद उसे जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया था। कैदी यहां से फरार न हो जाए, इसके लिए तीन पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। कैदी के अस्पताल से फरार होने के बाद उसकी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। आखिर पुलिस के पहरे के बाद भी कैदी कैसे फरार हो गया, यह एक अहम सवाल बना हुआ है।