झूलाघाट (पिथौरागढ़) । अंतरराष्ट्रीय झूलापुल पर एसएसबी की ओर से लगाया गया एफआरएस (फेस रिकोग्नाइज्ड सिस्टम) अब सुरक्षा सुविधा सिस्टम में शामिल हो गया है।
एसएसबी की ओर से झूलापुल पर दोनों देशों के नागरिकों के आवागमन के लिए पूर्व में राष्ट्रीय पहचान पत्र या नेपाली नागरिकता देखकर रजिस्टर में संबंधित राहगीर का नाम लिखा जाता था। इसके लिए जवानों को अतिरिक्त कार्य करना पड़ रहा था। इसे देखते हुए एसएसबी ने झूला पुल पर ट्रायल बेस पर एफआरएस सिस्टम लगवाया। यह सिस्टम राहगीरों का चेहरा और आईडी लेकर कंप्यूटर में सुरक्षित रख रहा है। इससे भारत-नेपाल आने-जाने वाले राहगीरों के एफआरएस सिस्टम के सामने जाने पर चेहरे की पहचान कर आगे बढ़ने की अनुमति मिल रही है। इस सिस्टम से जवानों का कार्य सरल हो गया है। साथ ही जिस राहगीर का फेस आईडी रिकोग्नाइज्ड हो गया हो उसे झूलापुल पर लाइन में लगने की आवश्यकता नहीं है।
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अंतरराष्ट्रीय झूलापुल पर जिस भी राहगीर की भारत-नेपाल के नागरिकों की फेस आईडी बन गई हो वह लाइन में लगकर भीड़ न बढ़ाए। वह खुद लाइन से हटकर फेस आईडी सिस्टम में जाकर फेस रिकोग्नाइज्ड करा खुद आ-जा सकता है। इससे पुल पर अतिरिक्त भीड़ जमा होने से बचा जा सकेगा। साथ ही राहगीरों को भी परेशानी नहीं होगी। प्रतीक, सहायक कमांडेंट एसएसबी झूलाघाट