सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज में सोमवार से रिसेंट एडवांसेज इन साइंस एंड टेक्नालाजी विषय पर आयोजित कांफ्रेंस में वैज्ञानिकों ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या और उसके कारण पैदा होने वाली खाद्यान्न की चुनौती से निपटने के लिए तरीके तलाशने की जरूरत है। आज आतंकवाद, गरीबी, प्राकृतिक आपदाओं के खतरे बढ़ते जा रहे हैं। जैव विविधता पर संकट गहरा रहा है।
बाढ़ और गर्मी की विभीषिका लगातार बढ़ रही है। वैज्ञानिकों को चाहिए कि वह इन समस्याओं का समाधान खोजें।
मुख्य अतिथि आईआईटी रुड़की के पूर्व कुलपति प्रो. पीके पांडे और विशिष्ट अतिथि बिरला इंस्टीट्यूट आफ अप्लाइड साइंस एंड टेक्नालाजी भीमताल के निदेशक प्रो. बीएस बिष्ट ने कांफ्रेंस का उद्घाटन किया। प्रो. पांडे ने कहा कि 2030 तक देश की जनसंख्या का घनत्व बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा। तब लोगों के सामने सबसे पहली समस्या दूध, राशन की आने लगेगी। प्रो. बिष्ट ने भी लोगों के सामने आने वाली समस्याओं और उनके समाधान के तरीके निकालने के सुझाव दिए।
सीमांत इंजीनियरिंग कालेज के निदेशक प्रो. बीके सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह कॉलेज के लिए गरिमामय क्षण है। कई विद्वानों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इनमें स्मार्ट सिटी, मैकेनिकल, सिविल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, डिजीटल इंडिया पर विस्तार से जानकारी दी गई।
प्रो. केबी नक और प्रो. वाईपी गुप्ता ने अपने शोधपत्र में तमाम जानकारियां दीं। संचालन तरू माहरा, पुष्पेंद्र खड़ायत, सुमित जोशी ने किया। इस मौके पर डा. मनीषा बिष्ट, जयदीप किशोर, डा. बीपी जोशी, देवनिधि बिष्ट, विवेक कुमार, शैलेंद्र जोशी, मोहम्मद मुर्सीलीन, केएस देशवाल, सचिन गुप्ता, एसपी चौहान, ज्योति जोशी, पुनीत वर्मा, मनोज पुनेठा आदि थे।