गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय पर्यावरण और सतत विकास संस्थान कोसी कटारमल अल्मोड़ा की ओर से ‘हमारी विविधता हमारी धरोहर’ विषय पर तीन दिनी कार्यशाला बुधवार से शुरू हो गई है। इसमें भारत-नेपाल के विशेषज्ञों ने जैव विविधता पर महत्वपूर्ण जानकारी दी।
गंगोलीहाट में हुई कार्यशाला में भारतीय वन्य जीव संस्थान के डा. भूपेंद्र अधिकारी ने वन और वन्य जीव आवास, आईसी मोड काठमांडू के डा. ताशी दोरजी ने जैव विविधता, भूटान की संस्कृति पर तो अमीना महाजन ने नेपाल की विविधता और प्रवास, पिथौरागढ़ महाविद्यालय के डा. चंद्र सिंह नेगी ने भू-क्षेत्र की पवित्रता, विविधता, चिया नैनीताल के डा. पंकज तिवारी ने अल्प उपयोग किए संसाधनों से आजीविका वृद्धि के बारे में विद्यार्थियों को बताया। यूसेक के डा. गजेंद्र सिंह ने प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन और विभिन्न जंगलों की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। गोविंद बल्लभ पर्यावरण संस्थान के डा. रवींद्र जोशी, रवि पाठक ने जैव विविधता को बनाए रखने के लिए विभिन्न परागवाहकों की उपयोगिता के संबंध में बताया। भारतीय वन्य जीव संस्थान की डा. आरती काला ने जंतुओं की विविधता की जानकारी के साथ ही संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
बताया गया कि कार्यशाला का उद्देश्य कैलाश भू-क्षेत्र के विभिन्न सांस्कृतिक समुदाय, विद्यालयी छात्र-छात्राओं, सफल उद्यमी, कृषक, विभागीय अधिकारी, विभिन्न वर्गों के व्यक्तियों को जैव विविधता, सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और सतत विकास के लिए मंच प्रदान करना है। कार्यशाला में विभिन्न विद्यालयों से आए विद्यार्थियों और परियोजना सहभागियों ने कैलाश भू-क्षेत्र के जैव विविधता, सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण पर विचार रखे। कार्यशाला में मल्ला जोहार, तल्ला जोहार, व्यास, चौंदास, डीडीहाट, गंगोलीहाट, सोर, मूनाकोट, गोरंग, बांस, जजुराली आदि क्षेत्रों से आए लोग भाग ले रहे हैं।