पंचेश्वर बांध के विरोध में जौलजीबी में नारेबाजी करते लोग
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महाकाली की आवाज संगठन और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को पंचेश्वर बांध के विरोध में प्रदर्शन किया। लोगों ने ‘जौलजीबी मेला होने दो, पंचेश्वर बांध रहने दो’ लिखी हुई टोपियां पहनी और हाथों में पोस्टर पकड़े। हालांकि लोगों ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यक्रम में कोई बाधा नहीं, पहुंचाई लेकिन बांध के विरोध में अपनी आवाज उन तक पहुंचाने का प्रयास किया।
लोगों ने कहा कि मुख्यमंत्री हमारे अतिथि हैं, इसलिए उनका कोई विरोध नहीं होगा। जौलजीबी कस्बा और संपूर्ण मेला क्षेत्र पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आ रहा है। लोगों का कहना है कि जौलजीबी का अपना ऐतिहासिक महत्व रहा है। पिछले 100 वर्षों से यह मेला आयोजित हो रहा है। मेले के साथ नेपाल के लोगों का हित भी जुड़ा है और तिब्बत की मंडी से आने वाले सामान की बिक्री का केंद्र भी जौलजीबी ही है। कहा गया कि एक तरफ मुख्यमंत्री इस मेले के ऐतिहासिक महत्व को स्वीकारते हुए उद्घाटन के लिए पहुंचते हैं और दूसरी तरफ बांध के निर्माण के बाद आने वाले समय में इस मेले का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।
जौलजीबी व्यापार संघ के अध्यक्ष धीरेंद्र धर्मशक्तू के नेतृत्व में एकत्र लोगों ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री जौलजीबी के महत्व को स्वीकार करते हैं तो उनको सबसे पहले बांध निर्माण का प्रस्ताव रोकने की सिफारिश करनी चाहिए। कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने कहा कि यह मेला धारचूला विधानसभा क्षेत्र की पहचान है। बांध निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने से लोगों की आशंका बढ़ गई है और जौलजीबी के अस्तित्व को लेकर लोग चिंता में हैं।
प्रदर्शन में धारचूला के पूर्व व्यापार संघ अध्यक्ष कैलाश रावत, महाकाली की आवाज संगठन के संयोजक शंकर खड़ायत, भूपेंद्र सिंह, प्रकाश राम, रोहित जोशी, कमल जोशी आदि शामिल थे। आम जनता भी बांध के विरोध में चलाए जा रहे आंदोलन के समर्थन में है।