नोटबंदी के कारण पिथौरागढ़ बाजार में कई दिनों से है सन्नाटे का आलम
- फोटो : अमर उजाला
नोटबंदी के बाद लगातार गिर रही बाजार की स्थिति से हर कोई चिंता में है। बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी है। ग्रामीण अंचलों में हालात इतने खराब हो गए हैं कि कई व्यापारी दिनभर में एक पैसे की बिक्री तक नहीं कर पा रहे हैं। गांव के लोग खेत में पैदा हो रही राई, पालक, गडेरी की सब्जी से काम चलाने को मजबूर हैं।
इस कारण अब गांव में पैदा होने वाली सब्जियां बाजार में नहीं आ पा रही है। लोकल सब्जियों का बाजार भी मंदा पड़ गया है। मैदानी इलाकों से सब्जी की आवक कम हो गई है। अब बड़े आढ़ती एक दिन में एक या दो ट्रक से ज्यादा सब्जी नहीं मंगा पा रहे हैं। पहले तक यहां रोज पांच-छह ट्रक सब्जी आती थी।
डीडीहाट के ग्रामीण अंचलों मिर्थी, नारायणनगर, सानदेव, जौरासी में तो कई व्यापारियों ने दुकानें बंद कर दी हैं। व्यापारियों का कहना है कि पूरे दिन बैठने के बाद भी एक रुपए की बिक्री नहीं हो रही है। गांव के लोगों के पास पैसा समाप्त हो गया है। बैंकों से नगद राशि नहीं मिल पा रही है। बैंक खातों में पैसा होने के बाद भी लोग परेशान हैं। डीडीहाट नगर में सन्नाटे का आलम है। गांवों से लोग बहुत कम संख्या में बाजार आ रहे हैं। गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, मुनस्यारी आदि स्थानों पर लोग सुबह से ही बैंकों की कतार में लग रहे हैं। शाम को अधिकांश लोग निराश लौट रहे हैं।
सब्जी की बिक्री में भारी गिरावट
सब्जी विक्रेता देवकीनंदन पंगरिया का कहना है कि नौ नवंबर के बाद सब्जी की बिक्री में भारी गिरावट आई है। लोग अब कम मात्रा में सब्जी ले जा रहे हैं। शादी विवाह के लिए भी सब्जी की खपत कम है। उन्होंने कहा कि सब्जी के फुटकर व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। क्योंकि सब्जी नहीं बिकी तो उसके खराब होने का भी डर रहता है।
हालात जल्दी सुधारने के प्रयास हों
सब्जी विक्रेता ललित पुनेड़ा का कहना है कि सरकार को हालात सुधारने के प्रयास करने चाहिए। समस्या बैंकों से पैसा नहीं मिलने के कारण आ रही है। यदि बैंकों से पैसा मिलने लग जाए तो लोग खरीदारी भी करने लगेंगे। उन्होंने कहा कि सब्जी के व्यवसाय पर असर पड़ा है। ग्रामीण अंचलों से सब्जी कम मात्रा में आ रही है।