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चंडाक में सरकार के नाम दर्ज 1500 नाली भूमि की होगी घेरबाड़

Thu, 17 Sep 2015 10:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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वर्ष 2009 में अमर उजाला के अभियान के बाद बची देवदार और बांज के पेड़ों से आच्छादित चंडाक की 1500 नाली जमीन के दिन बहुरने की उम्मीद जग गई है। विधायक मयूख महर की पहल पर सरकार ने भूमि के उपयोग की कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रभारी डीएम को तत्काल चंडाक में राज्य सरकार के नाम दर्ज जमीन की घेरबाड़ कराने के आदेश दिए हैं।
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चंडाक में देवदार के पेड़ सुखाने पर अमर उजाला में चली मुहिम के बाद विधायक महर ने 12 सितंबर को पेड़ों के संरक्षण के साथ ही चंडाक में राज्य सरकार के नाम दर्ज हुई जमीन को खुर्द-बुर्द होने से बचाने के लिए ठोस पहल करने की बात कही थी। 14 सितंबर को देहरादून में विधायक ने मुख्यमंत्री के सामने चंडाक की जमीन को बचाने का मामला उठाया। विधायक ने बताया कि मुख्यमंत्री ने प्रभारी डीएम विनोद गिरी गोस्वामी को चंडाक में राज्य सरकार की जमीन में तत्काल घेरबाड़ कराने के साथ ही सुरक्षा के प्रबंध करने के आदेश दिए हैं। महर ने कहा कि चंडाक का जंगल पिथौरागढ़ शहर ही नहीं आसपास के इलाके को प्राणवायु देता है। चंडाक की जमीन संघर्ष के बाद हासिल हुई है, उसे खुर्द-बुर्द नहीं होने दिया जाएगा।
मालूम हो कि वर्ष 2009 में चंडाक में मिशन अस्पताल के लिए दी गई जमीन को खुर्द-बुर्द किया जाने लगा। (अस्पताल काफी समय पहले बंद हो गया था) स्टांप पेपर पर जमीन की खरीद-फरोक्त होने लगी, कब्जे शुरू हो गए। पेड़ जड़ से उखाड़े जाने लगे, शहर के तथाकथित जागरूक लोग और पर्यावरण प्रेमियों ने चुप्पी साधी थी। ऐसे में अमर उजाला ने चंडाक की जमीन को बचाने के लिए मुहिम छेड़ दी। घपलेबाजी की परत दर परत खुलने के बाद प्रशासन ने तत्कालीन तहसीलदार नरेश दुर्गापाल से मामले की जांच कराई। तत्कालीन एसडीएम देवमूर्ति यादव ने अलग-अलग श्रेणी की भूमि को रिजर्व फारेस्ट घोषित करने, राज्य सरकार के नाम दर्ज करने की संस्तुति डीएम को की। मिशन ट्रस्ट मामले को हाईकोर्ट ले गया। हाईकोर्ट के आदेश पर सरकारी जमीन के मामले की सुनवाई राजस्व न्यायालय में हुई। राजस्व न्यायालय के आदेश के बाद करीब 1500 नाली जमीन राज्य सरकार के नाम दर्ज हुई। मिशन ट्रस्ट के दावे वाली करीब 700 नाली जमीन का मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
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