डीडीहाट (पिथौरागढ़)। पलायन के कारण केवल गांव ही उजाड़ नहीं हो रहे हैं बल्कि शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले विद्यालयों की छात्र संख्या भी लगातार घट रही है। इसका उदाहरण डीडीहाट विकासखंड के आठाबीसी क्षेत्र का राजकीय इंटर काॅलेज जौरासी है। इस इंटर काॅलेज में छात्र संख्या मात्र 106 रह गई है।
राज्य बनने के बाद भले ही गांवों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं के भले ही कई दावे हुए हों लेकिन लोग असुविधाओं के कारण आज भी लगातार पलायन कर रहे हैं। जौरासी क्षेत्र को आठाबीसी के नाम से भी जाना जाता है। उत्तराखंड राज्य गठन से पहले इस क्षेत्र के करीब दो दर्जन से अधिक गांवों में पांच हजार से अधिक की आबादी रहती थी। इस पूरे क्षेत्र के एक मात्र राजकीय इंटर काॅलेज जौरासी में 2005 तक 800 से अधिक विद्यार्थी पढ़ने आते थे।
वर्ष 2005 से 2012 तक जीआईसी जौरासी में छात्र संख्या पलायन के चलते 250 से 280 तक रह गई थी। वर्ष 2021 में यह छात्र संख्या 180 तक पहुंच गई। सरकार ने जीआईसी जौरासी को 2021 में सीबीएससी से संबद्ध करते हुए अटल उत्कृष्ट इंटर कालेज तो बना दिया लेकिन सरकार का यह प्रयास भी इस क्षेत्र के पलायन को नहीं रोक सका। वर्ष 2024 में इस स्कूल में छात्र संख्या मात्र 106 रह गई है।
जौरासी क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता डीएस बोरा कहते हैं कि जौरासी क्षेत्र में जरूरी सुविधाओं का अभाव है। स्वास्थ के नाम पर मात्र आयुर्वेदिक अस्पताल है। ग्रामीण अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य के लिए डीडीहाट या पिथौरागढ़ नगर में रह रहे हैं। जो नौकरीपेशा हैं वह खटीमा, झनकट, हल्द्वानी आदि मैदानी भागों में जाकर बस रहे हैं। गांवों में अब नाममात्र के परिवार रह गए हैं।
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गांवों से लगातार पलायन होना चिंता का विषय है। जौरासी क्षेत्र से हो रहे पलायन को रोकने के लिए ग्रामीणों से बातचीत करने और लाभकारी योजनाओं को बनाने के निर्देश विकासखंड को दिए हैं। - खुशबू पांडेय, एसडीएम डीडीहाट।