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रीति-रिवाज और भाषा संरक्षण पर जोर

Thu, 11 Feb 2016 10:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला (पिथौरागढ़)।
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 उच्च हिमालयी क्षेत्र में सिर्फ भेड़पालन के जरिए आजीविका चलाने वाले अनवाल समुदाय के लोगों ने अब अपने रीति-रिवाज, भाषा, परंपरा और संस्कृति के संरक्षण के लिए सजग रहने का फैसला लिया है।
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 जनजातियों की तरह समान भौगोलिक परिस्थिति में रहने वाले अनवाल समुदाय के लोग आज भी जनजाति आरक्षण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अनवाल समुदाय की यहां हुई बैठक में कहा गया कि हकों के लिए संघर्ष जारी रखा जाएगा।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए अनवाल समुदाय के धारचूला शाखा के अध्यक्ष गुमान सिंह बिष्ट ने कहा कि भविष्य में अनवाल समुदाय के रीति-रिवाज, भाषा परंपरा और संस्कृति के संरक्षण के लिए कारगर योजना बनाई जाएगी।
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इस दौरान अनवाल समुदाय के हकों के लिए विगत 30 वर्षों से संघर्ष कर रहे संस्था के संस्थापक एवं संरक्षक पावर सिंह बिष्ट को स्मृति चिन्ह देकर और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।

अपने सम्मान को उन्होंने अनवाल समुदाय के संघर्षों का सम्मान बताया। कहा कि अनवाल समुदाय के हकों के लिए नई पीढ़ी को आगे आना होगा।

 एसएसबी के सेवानिवृत्त महानिरीक्षक हेम चंद्र खर्कवाल ने कहा कि सरकारी सेवाओं में आरक्षण मात्र अनवाल समुदाय का लक्ष्य नहीं है। संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण से ही समुदाय को बचाया जा सकता है।

बाद में कार्यकारिणी का विस्तार करते हुए लक्ष्मण फर्स्वाण, दौलत सिंह, खुशाल बिष्ट और हरगोविंद सिंह को उपाध्यक्ष, नारायण सिंह और गोविंद दानू को महासचिव, रूप सिंह, कल्याण सिंह, हिमांशु बिष्ट, सुरेंद्र सिंह, नवीन खर्कवाल, राकेश तिवारी को सचिव बनाया गया।

साथ ही जीत सिंह कोरंगा, जगत सामंत, गोविंद बिष्ट, कृष्ण राणा, श्याम खर्कवाल, गगन नेगी, गोपाल दानू, भवान दानू को कार्यकारिणी का सदस्य बनाया गया। बैठक में संरक्षक रूकुम बिष्ट, ईश्वर बिष्ट, जीवन बिष्ट, त्रिलोक दानू, डिगर दानू, प्रवक्ता राजू नेगी, मीडिया प्रभारी जीवन बिष्ट आदि थे।
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