इस तहसील में दारमा घाटी के अंतिम गांव मार्छा में पिछले दिनों आए बर्फीले तूफान से आठ मकानों को नुकसान पहुंचा है। इन टूटे मकानों के अंदर भालुओं का झुंड घुस गया। भालुओं ने घरों में रखा सारा सामान नष्ट कर दिया है। अब माइग्रेशन पर जब लोग अपने गांव पहुंचे तो घरों की हालत देखकर घबरा गए। उन्होंने इसकी जानकारी एसडीएम को दी।
मार्छा गांव के लोग शीतकाल में घाटियों पर प्रवास करते हैं। मई से इनकी मूल गांवों को वापसी होती है। गांव के लोगों ने एसडीएम आरके पांडे को बताया कि मार्छा गांव में आठ मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। कुछ मकानों को आंशिक तौर पर नुकसान पहुंचा है। पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त मकान रहने लायक नहीं है। ग्राम प्रधान सुरीति देवी ने बताया कि माइग्रेशन से लौटकर मूल गांवों में पहुंचे लोगों के सामने अब गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।
उनके पास भोजन और आवास की कोई व्यवस्था नहीं है। मांग की कि शीघ्र इस गांव की सरकारी सस्ते-गल्ले की दुकान में राशन भेजा जाए, ताकि लोगों को जल्दी राहत मिल सके। माइग्रेशन पर जाते समय यह लोग मकानों को बंद कर जाते हैं। उनमें राशन और बिस्तर छोड़ जाते हैं, ताकि माइग्रेशन से लौटने के बाद इनका उपयोग किया जा सके, लेकिन इस बार लोगों को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है।