टनकपुर(चंपावत)। डाॅ. एपीजे अब्दुल कलाम इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी में यूकॉस्ट की ओर से बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। यूकॉस्ट के महानिदेशक डाॅ. दुर्गेश पंत ने कहा कि भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी नई तकनीकों का महत्व बढ़ने वाला है। उन्होंने छात्रों को आईपीआर के माध्यम से अपने विचारों को संरक्षित करने और व्यावसायिक अवसरों में परिवर्तित करने के लिए प्रेरित किया।
शुक्रवार को इंजीनियरिंग काॅलेज में कार्यशाला का उद्घाटन यूकॉस्ट के महानिदेशक ने किया। उन्होंने इंटरनेट, सोशल मीडिया, रोबोटिक्स और थ्री डी प्रिंटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों की भूमिका को रेखांकित किया। बताया कि कैसे एलन मस्क के प्रयासों से अंतरिक्ष अभियानों में क्रांतिकारी परिवर्तन आ रहे हैं। संस्थान महानिदेशक प्रो. हरद्वारी लाल मंडोरिया ने कहा कि वर्तमान युग में इनोवेशन और नई सोच के संरक्षण के लिए आईपीआर एक महत्वपूर्ण साधन है। डीएलएफ साइबर सिटी के निदेशक जगत बिष्ट ने आईपीआर के प्रमुख घटक पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, भौगोलिक संकेत और व्यापार रहस्य पर चर्चा की। यूकॉस्ट के हिमांशु गोयल ने भौगोलिक संकेतकों के संरक्षण और स्थानीय ज्ञान की सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया। एवेक्स सिस्टम के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी बोहितेश मिश्रा ने बताया कि उद्योग जगत में बौद्धिक संपदा अधिकारों का इस्तेमाल कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता और विकास में कैसे होता है।