धारचूला में धरना देते सिमखोला के लोग।
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सिमखोला के आपदा प्रभावितों ने 55 किमी दूर तहसील मुख्यालय आकर धरने पर बैठ गए। उन्होंने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इन लोगों का आरोप है कि सिमखोला में 12 मकान बह गए। 20 मकान खतरे की जद में आ गए लेकिन सरकारी तंत्र ने चार दिन बीतने के बाद भी उनकी सुध नहीं ली।
एसडीएम कार्यालय पहुंचे कुशमति देवी, धीरू सिंह, राकेश सिंह, भवान सिंह, शंकर सिंह, मान सिंह, मोहन सिंह, अंजू देवी, प्रेमा देवी, बिंदु देवी, बिरखू सिंह आदि का कहना था कि दो जुलाई को सिमखोला में तबाही मच गई। चार दिन बीतने के बाद भी लोगों को किसी प्रकार की सहायता नहीं मिली। न ही उन लोगों को रेस्क्यू किया गया है। राशन तक की व्यवस्था सरकार और प्रशासन की ओर से नहीं की गई। वह लोग जंगलों से गिरते पड़ते दो दिन में तहसील मुख्यालय पहुंचे हैं। तहसील में एसडीएम और अन्य किसी भी अधिकारी के मौजूद न होने से इन लोगों का पारा और चढ़ गया। इन लोगों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इन लोगों का कहना था कि वर्ष 2013 और 2017 में भी सिमखोला में तबाही मची थी। तब भी प्रशासन ने उन लोगों के साथ पक्षपात किया। कहा कि प्रशासन और सरकार की उदासीनता के खिलाफ वह लोग आंदोलन छेड़ेंगे। समाचार लिखे जाने शाम 7 सवा सात बजे तक यह लोग धरने में डटे थे।