नाचनी/पिथौरागढ़। अपने सपनों के घर को दरकते देखने के दर्द को झेलना और उसे बयां करना बहुत मुश्किल है। ऐसी ही कुछ स्थिति है दाफा गांव में भूस्खलन से बेघर हुए पांच मकानों में रह रहे सात परिवारों की। बारिश ने जमीन खिसकाई तो इन परिवारों की जिंदगी ही बदल गई। घरों में पड़ी बड़ी-बड़ी दरारों ने संकेत दिया कि अब यहां खतरा है और ये परिवार बेघर होकर रिश्तेदारों के यहां शिफ्ट हो गए। प्रशासन ने हालात के मारे इन परिवारों के दर्द पर हल्का मरहम लगाते हुए टेंट, रसोई गैस और बर्तन मुहैया कराए हैं।
बीते मंगलवार की सुबह थल-मुनस्यारी सड़क पर ला झेकला से ऊपर स्थित दाफा गांव की जमीन दरकी तो केशर राम पुत्र महेंद्र राम, बलवंत राम पुत्र महेंद्र राम, खुशाल सिंह पुत्र धन सिंह, मोहन सिंह पुत्र धन सिंह, उमेद सिंह पुत्र धन सिंह, मोहन सिंह पुत्र दुर्गा सिंह और खुशाल सिंह पुत्र दुर्गा सिंह के मकानों की नींव हिल गई। घरों की दीवारों पर बड़ी-बड़ी दरारों से परिवार दहशत में आ गए। आननफानन प्रभावित परिवारों ने रिश्तेदारों के घर में शरण ली।
बुधवार को तहसील से आए कानूनगो, राजस्व उपनिरीक्षक ने प्रभावित परिवारों को जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई। ग्रामीणों के मवेशियों को भी सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कराया गया। प्रभावितों ने बताया कि कल (मंगलवार) सुबह तक सबकुछ ठीक था लेकिन लगातार हो रही बारिश ने जिंदगी पर चिंता का ब्रेक लगा दिया। उनके घर अब रहने लायक नहीं रह गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि जैसे-तैसे कर जीवन भर की कमाई लगाकर आशियाने बनाए थे। अब कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि आगे क्या होगा।
एक परिवार ने बताया कि घर तो जा रही रहा है लेकिन भूस्खलन जमीन को भी निगल रहा है, उनके पास तो अब कुछ भी नहीं बचा। ग्रामीणों को सामग्री वितरण और मवेशियों को शिफ्ट कराने में भगत सिंह, कुणाल सिंह, गोविंद सिंह, ललित सिंह, मनोज सिंह, महेश सिंह आदि ने सहयोग दिया।
पल्ला दाफा के ग्रामीण में मुश्किल में
मूसलाधार बारिश से दाफा गांव में भूस्खलन तो हो ही रहा है, साथ ही बरसाती नाले के वेग से संपर्क मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो गया है। इस कारण दाफा गांव का 500 मीटर दूर पल्ला दाफा गांव से संपर्क भी टूट गया है। सामाजिक कार्यकर्ता भगत बाछमी ने बताया कि दोनों गांवों के लोगों को अब आवाजाही के लिए तीन किलोमीटर की चढ़ाई चढ़नी पड़ रही है। पल्ला दाफा में 14 परिवार रहते हैं। संपर्क टूटने से आवाजाही में दिक्कत होने से यहां के ग्रामीण भी परेशान हैं। इन ग्रामीणों ने भी प्रशासन से राहत सामग्री उपलब्ध कराए जाने की मांग की है।
सिमाली गांव में मकान और गोशाला पर मंडराया खतरा
गणाई गंगोली। तहसील के सिमाली गांव में भूस्खलन से ठाकुर सिंह के मकान और गोशाला को खतरा पैदा हो गया है। मकान के नीचे लगातार भूस्खलन हो रहा है। ग्राम प्रधान सुनील सिंह बोरा ने इसकी सूचना तहसील प्रसाशन को देकर सुरक्षा के इंतजाम करने की मांग की है। संवाद
गणेश चौक के पास पहाड़ी दरकी
बेड़ीनाग। लगातार हो रही है बारिश के कारण मंगलवार देर रात नगर में गणेश चौक के पास पहाड़ी दरक गई। इससे मकान पर पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने शुरू हो गए। जानकारी मिलते ही एसडीएम आशीष जोशी और प्रभारी थानाध्यक्ष भुवन गहतोड़ी टीम के साथ स्थल पर पहुंचे। मकान स्वामी और किरायेदारों को सुरक्षित बाहर निकाला।
गणेश चौक में इंद्रा बाफिला के मकान के पीछे की पहाड़ी देर रात अचानक भरभराकर गिर गई। आनंद सिंह बाफिला के मकान की छत पर भी पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने शुरू हो गए। इससे आसपास के लोगों में खलबली मच गई। प्रशासन ने रात में ही मकानों में रह रहे लोगों को शिफ्ट किया। बुधवार को एसडीएम आशीष जोशी ने राजस्व टीम के मौके पर पहुंचे और आपदा प्रभावित स्थल का निरीक्षण किया और खतरे की जद में आ रहे मकान स्वामियों से दूतरी जगह शिफ्ट होने को कहा। इधर, प्रदीप सिंह राठौर के मकान के पास भूस्खलन होने मकान खतरे की जद में आ गया है। मकान में रह रहे लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट किया। एसडीएम ने बताया कि मानक के अनुसार जो मदद होगी, वह प्रभावितों को दी जाएगी।
खतरे को देखते हुए इंद्रा बाफिला अपने परिवार को मवेशियों के साथ बनौली गांव में शिफ्ट हो गई हैं। इसके अलावा विभिन्न गांवों में पैदल रास्ते और कई घरों की सुरक्षा दीवार भी ध्वस्त होने की जानकारी मिली है। एसडीएम आशीष जोशी ने बताया कि सभी राजस्व निरीक्षकों को क्षेत्र में बने रहने और आपदा से संदर्भ में कोई सूचना होने पर कंट्रोल रूम देने के निर्देश दिए हैं।